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Tuesday, November 3, 2026

यदुवंशी समाज सबसे पहले बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करता है: राजभर

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अखिलेश जी काशी, अयोध्या और मथुरा के मंदिरों में जाने से आपकी कंपकपी क्यों छूटने लगती है : ओम प्रकाश राजभर 

अखिलेश के वाराणसी दौरे पर ओम प्रकाश राजभर का तंज भरा सोशल मीडिया पोस्ट

यदुवंशी समाज सबसे पहले बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करता है: राजभर

‘अखिलेश यादव का मन मन केवल मस्जिद, मजार, ईदगाह, दरगाह और कब्रिस्तान में ही लगता है’

हिन्दू समाज आपको धिक्कारने लगेगा: राजभर

तुष्टिकरण वाली राजनीति मत कीजिए अखिलेश जी: राजभर

लखनऊ
 सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए राजभर ने लिखा कि अखिलेश यादव आज बनारस पधार रहे हैं, मगर अफसोस की बात है कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में शीश नवाने की भी उनकी हिम्मत नहीं हो रही है। उन्होंने सपा प्रमुख को चेतावनी देते हुए कहा कि वे इतनी भी तुष्टिकरण वाली राजनीति न करें कि हिंदू समाज उन्हें धिक्कारने लगे।

अयोध्या और मथुरा में दर्शन करने में छूटती है अखिलेश की कंपकपी
कैबिनेट मंत्री ने अखिलेश यादव के पिछले दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले जब वे अयोध्या गए थे, तब वहां भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पास से मुंह घुमाकर निकल गए थे। इसी तरह जब वे मथुरा जाते हैं, तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की तरफ देखने से भी उनकी कंपकंपी छूटने लगती है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि न जाने क्यों अखिलेश यादव का मन केवल मस्जिद, मजार, ईदगाह, दरगाह और कब्रिस्तान में ही लगता है।

सावन में यदुवंशी समाज के निमंत्रण पर भी बनाया था बहाना 
ओम प्रकाश राजभर ने काशी की परंपरा की याद दिलाते हुए कहा कि सावन के पवित्र महीने में काशी का यदुवंशी समाज सबसे पहले बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करता है। पिछले वर्ष यदुवंशी समाज की ओर से अखिलेश यादव को भी इस पावन अनुष्ठान के लिए निमंत्रित किया गया था, लेकिन तब भी वे न जाने कौन सा बहाना बनाकर बैठ गए थे और जलाभिषेक करने नहीं आए।

आत्ममंथन करें अखिलेश यादव 
सपा प्रमुख को आत्ममंथन करने की नसीहत देते हुए राजभर ने कहा कि यह बिल्कुल सही कहा गया है कि जब भगवान की आज्ञा होती है, तभी इंसान को उनके पावन स्वरूप के दर्शन मिलते हैं। इस लिहाज से अखिलेश यादव को यह आत्ममंथन जरूर करना चाहिए कि आखिर क्यों न तो प्रभु श्रीराम, न भगवान श्रीकृष्ण और न ही समूचे विश्व के नाथ कहे जाने वाले बाबा विश्वेश्वर उन्हें अपने दरबार में फटकने देना चाहते हैं।

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