इंदौर
पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) का 30 अक्टूबर को दिल्ली के जेएनएल स्टेडियम में शानदार कॉन्सर्ट हुआ. इस इवेंट में सिंगर के कई हजार फैंस पहुंचे थे. हालांकि, इस कॉन्सर्ट से पहले आयोजकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में परमिशन नहीं दी थी. जब आयोजकों ने दिल्ली पुलिस की शर्तें पर हामी भरी, उसके बाद ही परमिशन दी गई है. एक तरफ दिलजीत बम की धमकियों का सामना कर रहे हैं. दूसरी तरफ अब उनके इंदौर में ऑरा इंडिया टूर के तहत होने वाले कॉन्सर्ट को लेकर विवाद होता दिख रहा है. दरअसल, महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक पत्र जारी किया है. जिसमें उन्होंने सिंगर से मांग की है कि इंदौर के कॉन्सर्ट में वो अपने चार गानों को ना गाएं. आइए पूरा मामला समझते हैं।
दिलजीत दोसांझ के इन चार गानों पर रोक की मांग
दिलजीत दोसांझ का ऑरा इंडिया टूर के तहत इंदौर में 15 नवंबर 2026 को सी-21 मॉल लाइव कॉन्सर्ट होने वाला है. इससे पहले कॉन्सर्ट को लेकर विवाद हो गया है. दरअसल, महिला एवं बाल विकास विभाग ने बड़ा पत्र जारी किया है. जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने सी-21 मॉल के मैनेजर को पत्र लिखकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है. पत्र में कहा गया है कि कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत दोसांझ 'पटियाला पैग', '5 तारा ठेके', 'जेब विचों फीम लब्बी आ' और 'जट्ट उत्थे फायर करदा जित्थे पबंदी हथियार दी' गाने न गाएं।
क्यों की रोक की मांग?
दिलजीत के इन चार गानों पर रोक की मांग पर विभाग का कहना है कि ये गाने छोटे बच्चों पर गलत प्रभाव डालते हैं और शराब-नशे के उपयोग के लिए प्रेरित करते हैं. कॉन्सर्ट में 5 साल से बड़े बच्चों का प्रवेश रखा गया है. बता दें कि विभाग ने यह कार्रवाई चंडीगढ़ के रहने वाले प्रोफेसर पंडितराव धारेनावर के 1 नवंबर 2026 के पत्र के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने बच्चों को स्टेज पर न बुलाने और बुलेट बेल्ट न पहनने की भी मांग की थी।
प्रोफेसर ने शिकायत में रखी थीं 3 मांगे
चंडीगढ़ के रहने वाले प्रोफेसर पंडितराव धारेनावर ने अपनी शिकायत में तीन मांगे रखी थीं. उन्होंने अपने पत्र में दिलजीत के चार गाने 'पटियाला पैग', '5 तारा ठेके', 'जेब विचों फीम लब्बी आ' और 'जट्ट उत्थे फायर करदा जित्थे पबंदी हथियार दी' को ना बजाने की मांग की. इसके अलावा उन्होंने तेज आवाज में गाने ना बचाने के लिए कहा था. उनके मुताबिक, इससे आवाज बच्चों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है. शिकायतकर्ता ने दिलजीत दोसांझ को सीने पर क्रॉस के आकार में चांदी के रंग की दो कारतूस बेल्ट पहनने से रोकने की मांग भी की थी. उनका मानना है कि सीने पर कारतूसों की बेल्ट पहनना बंदूक संस्कृति और हिंसा का प्रतीक है. इस तरह की वस्तुओं का प्रदर्शन दर्शकों को हिंसक व्यवहार के लिए उकसा सकता है।
शराब और नशे को बढ़ावा देने वाले गानों पर आपत्ति
प्रोफेसर ने अपनी शिकायत में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के आदेश (CWP/27011/2016) का हवाला दिया। उनका तर्क था कि शराब, नशे और हिंसा का महिमामंडन करने वाले गाने बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे 'नशा मुक्त भारत अभियान' का भी उल्लेख किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन गानों को संशोधित बोलों के साथ भी मंच पर प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
बच्चों को मंच पर बुलाने और बुलेट बेल्ट पहनने पर भी आपत्ति
प्रोफेसर ने कॉन्सर्ट में बच्चों को मंच पर बुलाने पर रोक लगाने की मांग भी की। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि तेज आवाज बच्चों की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है। शिकायत में दावा किया गया कि लाइव कॉन्सर्ट में ध्वनि का स्तर 120 डेसीबल से अधिक हो सकता है।
इसके अलावा उन्होंने तेज गति से चमकने वाली लाइटों को लेकर भी चिंता जताई। शिकायत में कहा गया कि 5 से 30 हर्ट्ज की आवृत्ति से चमकने वाली रोशनी कुछ बच्चों में दौरे पड़ने का कारण बन सकती है।
प्रोफेसर ने दिलजीत के सीने पर क्रॉस आकार में दो सिल्वर रंग की बुलेट बेल्ट पहनने या नकली धातु की गोलियां प्रदर्शित करने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस तरह के प्रतीक हथियार संस्कृति और हिंसा को बढ़ावा देने वाले संदेश दे सकते हैं। पांच साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों की मौजूदगी को देखते हुए उन्होंने इसे अनुचित बताया।
दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने 'ऑरा इंडिया टूर' पर हैं। इंदौर में 15 नवंबर को होने वाला कार्यक्रम इस टूर का भारत में दूसरा शो है। इससे पहले दिल्ली में भी उनके कॉन्सर्ट को लेकर इसी तरह का विवाद सामने आया था।



