7.7 C
Munich
Sunday, November 8, 2026

खनन और सड़क निर्माण के बीच हाथियों को मिला सुरक्षित रास्ता, झारखंड में 600 के करीब हाथियों का बसेरा

Must read

रांची
झारखंड में हाथियों की आवाजाही के तीन नए कारिडोर सामने आए हैं। दलमा से निकलकर हाथी रांची और लोहरदगा होते हुए गिरिडीह-हजारीबाग के रास्ते दुमका तक जा रहे हैं। इसके अलावा गिरिडीह-बोकारो के रास्ते रामगढ़ तक भी उनका विचरण हो रहा है। सितंबर में मानसून समाप्त होने के बाद जंगलों की सैटेलाइट और डिजिटल तस्वीरों से इन मार्गों की पुष्टि हुई।

लगातार पांचवें साल इन क्षेत्रों में 30 से अधिक हाथियों का झुंड विचरण करता मिला है। वन्यजीव विशेषज्ञ शहजाद आलम के अनुसार, खनन और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों से पारंपरिक कारिडोर में हाथियों की आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में नए रास्ते उनके जीवन की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इन मार्गों पर भोजन की पर्याप्त व्यवस्था भी है।

नए रास्तों ने हाथियों का जीवन किया सुरक्षित
नए रास्तों पर औद्योगिक और खनन गतिविधियां कम हैं। रात में यहां शांति रहती है, जिससे हाथियों को परेशानी नहीं होती। पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक नरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि हजारीबाग के पास रांची-पटना नेशनल हाईवे पर बने डिवाइडर को छोड़कर हाथियों की आवाजाही में कोई बड़ी बाधा नहीं है। दुमका से रामगढ़ तक उनकी आवाजाही हो रही है।

उन्होंने इन मार्गों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि यहां तोड़फोड़ की अनुमति नहीं होनी चाहिए। मिश्रा के अनुसार, 2022 से 2026 तक हाथियों की संख्या में कमी नहीं हुई है और इसकी वजह नए कारिडोर हो सकते हैं। राज्य सरकार के मुताबिक झारखंड के जंगलों में अभी 600 के करीब हाथी हैं। हालांकि दो साल पहले केंद्र सरकार की गणना में संख्या का अंतर है।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article