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Wednesday, November 4, 2026

अब गश्ती के नाम पर खानापूर्ति नहीं चलेगी, मोबाइल और CCTV से पुलिस पर नजर रखेंगे SSP

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रांची
 राजधानी में अब पुलिस की गश्ती केवल सड़कों पर वाहन दौड़ाने तक सीमित नहीं रहेगी। शहर के किस इलाके में पुलिस की गाड़ी पहुंची, कितनी देर रुकी, जवानों ने निर्धारित स्थानों पर गश्ती की या नहीं और ड्यूटी के दौरान कितनी सक्रियता दिखाई, इन सभी गतिविधियों पर अब सीधे एसएसपी की नजर रहेगी।

रांची पुलिस ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गश्ती की पूरी कार्यशैली में बदलाव किया है। गश्ती का मतलब सिर्फ सड़क पर पुलिस वाहन दिखना नहीं होगा, बल्कि हर निर्धारित स्थान पर पुलिस की मौजूदगी और हर जवान की ड्यूटी का डिजिटल हिसाब भी होगा। इसके तहत 276 पुलिस वाहनों को नए सिरे से गश्ती में लगाया गया है।

इन वाहनों की गतिविधियों की निगरानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जा रही है। खास बात यह है कि अब पुलिसकर्मियों की ड्यूटी की जवाबदेही भी तय होगी। यानी केवल गश्ती पर निकलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित क्षेत्र में पहुंचकर अपनी मौजूदगी भी प्रमाणित करनी होगी।

1100 स्थानों पर क्यूआर कोड, हर जगह पहुंचना होगा पुलिस को
रांची पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 1100 स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए हैं। गश्ती में तैनात पुलिसकर्मियों को निर्धारित स्थान पर पहुंचने के बाद क्यूआर कोड स्कैन करना अनिवार्य किया गया है। इससे पुलिस के पास यह डिजिटल रिकार्ड उपलब्ध होगा कि किस गश्ती वाहन के जवान किस स्थान पर पहुंचे और किस समय वहां उनकी मौजूदगी रही।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गश्ती के नाम पर खानापूर्ति करना आसान नहीं रहेगा। अगर कोई पुलिसकर्मी निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंचता है या वहां पहुंचने के बाद क्यूआर कोड स्कैन नहीं करता है तो उसकी जानकारी अधिकारियों तक पहुंच जाएगी।

लगातार लापरवाही या निर्धारित ड्यूटी का पालन नहीं करने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकेगी। इससे शहर के संवेदनशील इलाकों, बाजारों, सुनसान सड़कों और अपराध प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

एसएसपी खुद मोबाइल और टीवी स्क्रीन से रख रहे हैं नजर
नई व्यवस्था के तहत 276 वाहनों की एसएसपी राकेश रंजन अपने मोबाइल और कार्यालय में लगी टीवी स्क्रीन के माध्यम से गश्ती वाहनों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई गश्ती वाहन किसी स्थान पर निर्धारित समय से अधिक देर तक खड़ा रहता है तो इसकी जानकारी वायरलेस के माध्यम से संबंधित पुलिसकर्मियों से ली जाती है।

उनसे पूछा जाता है कि वाहन वहां क्यों रुका है और क्या कारण है। यदि किसी इलाके में कोई घटना हुई है, जांच चल रही है या पुलिसकर्मी किसी आवश्यक कार्य में लगे हैं तो उसकी जानकारी भी अधिकारियों को देनी होगी। इससे गश्ती वाहनों की मनमानी रुकने के साथ ही पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी तय होगी।

पहले गश्ती की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अधिकारियों को थाने या संबंधित जवानों से जानकारी लेनी पड़ती थी, लेकिन अब तकनीक के माध्यम से पूरी व्यवस्था पर एक साथ नजर रखी जा रही है।

550 स्थानों के कैमरों से शहर की सुरक्षा पर नजर
राजधानी के करीब 550 स्थानों पर पुलिस के कैमरे सक्रिय हैं। इन कैमरों के माध्यम से अलग-अलग इलाकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी का व्यवस्थित डेटा तैयार कर रही है, ताकि शहर के हर इलाके की स्थिति की लाइव जानकारी अधिकारियों तक पहुंच सके।

इस व्यवस्था से किसी इलाके में संदिग्ध गतिविधि, असामान्य भीड़, सड़क पर किसी तरह की परेशानी या आपराधिक घटना की सूचना मिलने पर पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। कैमरों से मिलने वाली जानकारी और गश्ती वाहनों की लोकेशन को मिलाकर पुलिस की निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हाल के दिनों में गश्ती और सीसीटीवी से पुलिस को मिली सफलता
1: गश्ती के दौरान धुर्वा में राहुल दुबे गैंग के पांच चार अपराधियों पर पुलिस की नजर पड़ी थी। इस मामले में चा पिस्टल और गोली के साथ छह अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

2: अंचल ऑफिस के कर्मचारी लक्ष्मीकांड मुंडा की हत्याकांड में सीसीटीवी से पुलिस को अहल सुराग मिला। इस मामले में पुलिस ने प्रदीप,अमित टोप्पो और सिंटु कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

3: कांके इलाके में हुई रामशंकर प्रसाद के घर में हुई डकैती कांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने छह लोगों को जेल भेजा। इस मामले में सीसीटीवी से पुलिस को अहम सुराग मिला।

    पुलिस की गश्ती व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। गश्ती और सीसीटीवी से पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है। गश्ती वाहनों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। क्यूआर कोड के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुलिसकर्मी निर्धारित स्थानों पर पहुंचें और अपनी ड्यूटी का सही तरीके से निर्वहन करें।
– राकेश रंजन एसएसपी, रांची।

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