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Thursday, November 5, 2026

ED गिरफ्तारी से बचने के लिए आजम खान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, CJI बेंच ने नहीं दी राहत

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लखनऊ/ नई दिल्ली

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की. इस दौरान अदालत ने गिरफ्तारी से राहत नहीं दी गई. इससे सपा नेता को झटका लगा. शीर्ष अदालत ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट जाओ वहां सुनवाई होगी। 

यह है मामला
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की. बता दें कि आजम खान को जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद गाजियाबाद की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद उन्हें गाजियाबाद की डासना जेल में रखा गया है. अदालत ने उन्हें 13 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया था। 

एक और आदेश को चुनौती
मामले में खान की पैरवी करने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पहुंचे थे। खान की तरफ से दाखिल याचिका में 1 नवंबर को पास आदेश को भी चुनौती गई थी। उस आदेश में विशेष अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजने की बात कही थी। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत के तौर पर हिरासत से छोड़े जाने का आग्रह किया था।

'मुझे बेल चाहिए'
लाइव लॉ के अनुसार, सिब्बल ने कहा, 'मैं हर चीज का सामना करूंगा, लेकिन मुझे जमानत चाहिए। मैं 80 साल का हो गया हूं। उन्होंने मुझे ईडी के केस में गिरफ्तार किया है और 28 मामले और भी हैं। तो मैं जेल में ही मर जाऊंगा।' उन्होंने आरोप लगाए हैं कि गिरफ्तारी पूरी तरह से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय जेल में रखने के मकसद से की गई है। उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आते ही ईडी ने उन्हें बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया था।

उन्होंने कहा, 'मामला साल 2006 का है। एफआईआर 2019 में फाइल हुई। पीएमएलए कहां से आ गया।' सिब्बल ने कहा, 'आरोपों को देखिए। एक लिस्ट है कि 2016 में आरोपी उसके घर में घुसे और 5 हजार रुपये और एक तोला सोने की बालियां लूटकर ले गए और घर के बुलडोजर से गिरा दिया। अगली शिकायत है कि उसी दिन आरोपी घर में घुसे और परिवार को धमकाकर नगदी लूट ली, 4 बकरियां ले गए और घर गिरा दिया। बकरी और गाय अपराध से अर्जित आय बन गईं हैं। ये सब क्या हो रहा है।'

इसपर सीजेआई ने कहा, ‘आपकी बात में दम हो सकता है, लेकिन हम कोई भी राय नहीं देना चाहते हैं।’

याचिका में क्या
आजम खान की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है, 'मोहम्मद आजम खान, जिनकी उम्र करीब 78 साल है, जो रामपुर से उत्तर प्रदेश विधानसभा के दस बार के सदस्य, उत्तर प्रदेश राज्य में पूर्व कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता और राज्य सभा और 17वीं लोकसभा के पूर्व सदस्य हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है…। क्योंकि उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह से गैर-कानूनी है, जिसमें गिरफ्तारी का तरीका और समय शामिल है। साथ ही प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग और सत्ता का गलत उपयोग हो रहा है, जिसमें क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया जा रहा है। ताकि एक विपक्षी नेता को अनिश्चित काल तक जेल में रखा जा सके, खासकर उत्तर प्रदेश राज्य में आने वाले विधानसभा चुनावों के कारण।'

16 नवंबर को होगी सुनवाई
इसी के खिलाफ आजम खान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. मगर उन्हें वहां से भी निराशा हाथ लगी. अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए साफ मना कर दिया. कहा कि याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सुनवाई करे. हाईकोर्ट को 16 नवंबर को सुनवाई के निर्देश दिए हैं. इससे स्पष्ट है कि आजम फिलहाल जेल में ही रहेंगे। 

जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा है केस
इससे पहले शनिवार को ईडी ने आजम खान को गिरफ्तार किया था. यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से संबंधित 426.46 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन और इमारतों की अस्थायी कुर्की के बाद हुई थी. यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की गई है. ईडी के अनुसार, विश्वविद्यालय की संपत्तियों का मौजूदा अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। 

26 एफआईआर के आधार पर ईडी ने शुरू की थी जांच
ईडी ने बताया था कि रामपुर के सींगन खेड़ा गांव के जौहर नगर में स्थित विश्वविद्यालय परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के स्वामित्व में है. इस ट्रस्ट की स्थापना और संचालन आजम खान करते हैं. वह संस्थान के मानद कुलाधिपति भी हैं. जांच रामपुर के अजीम नगर पुलिस थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी. इन एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन अधिग्रहित की गई थी। 

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