भोपाल में साहित्य का उत्सव: ऊर्जा मंत्री के हाथों काव्य संग्रह का विमोचन, भावनाओं की डोर से बंधा शहर

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भोपाल।
राजधानी भोपाल में शनिवार को साहित्य और संवेदनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे सांस्कृतिक परिदृश्य को जीवंत कर दिया। एजी पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित चर्चित लेखिका रीना यादुवेन्दु की काव्य कृति “एहसासों की डोर” का भव्य विमोचन एक गरिमामयी समारोह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, सिनेमा और प्रशासन जगत की नामचीन हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि समाज की आत्मा होती है। कविता मनुष्य के भीतर छिपी संवेदनाओं को आवाज देती है और ऐसे समय में, जब संवेदनशीलता कम होती जा रही है, इस तरह की कृतियाँ समाज को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का काम करती हैं।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुप्रसिद्ध लेखक इंद्रा डांगी, वरिष्ठ अभिनेता राजीव वर्मा, प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री रहात बद्र, आईएएस दिव्यांक सिंह सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने एक स्वर में “एहसासों की डोर” को भावनात्मक गहराई से भरपूर रचना बताया और इसे समकालीन कविता का सशक्त दस्तावेज कहा।

काव्य संग्रह “एहसासों की डोर” मानवीय रिश्तों, प्रेम, पीड़ा, उम्मीद और जीवन के सूक्ष्म भावों को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है। पुस्तक की एक खास पहचान इसकी रंगीन और कलात्मक चित्रण शैली है, जो कविताओं के भावों को दृश्य रूप देकर पाठकों को एक अलग ही अनुभूति से जोड़ती है।

प्रकाशक एजी पब्लिशिंग हाउस के संस्थापक योगेश शर्मा और सह-संस्थापक रक्षा बाजपेई ने लेखिका को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पुस्तक भावनात्मक साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एजी पब्लिशिंग हाउस का लक्ष्य केवल पुस्तक प्रकाशित करना नहीं, बल्कि ऐसे साहित्य को मंच देना है जो समाज से संवाद करे।

लेखिका रीना यादुवेन्दु ने मंच से सभी अतिथियों, प्रकाशक टीम और पाठकों का आभार जताते हुए कहा कि “एहसासों की डोर” उनके दिल की अनुभूतियों का प्रतिबिंब है। उन्होंने विश्वास जताया कि पाठक इन कविताओं में अपने जीवन के भावों की झलक जरूर पाएंगे।

कुल मिलाकर, “एहसासों की डोर” का यह विमोचन भोपाल के साहित्यिक इतिहास में एक यादगार और प्रेरणादायक क्षण बनकर उभरा, जहां शब्दों ने संवेदनाओं से हाथ मिलाया और साहित्य ने एक बार फिर अपनी ताकत का एहसास कराया।

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