पालमपुर। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र से एक गंभीर उपभोक्ता शिकायत सामने आई है, जहां भवारना निवासी हेमचंद्र ने आरोप लगाया है कि उन्होंने थाकुरद्वारा स्थित शिव शक्ति ट्रेडर्स से एक कटर मशीन खरीदी थी, जो खरीदने के महज एक से दो महीने के भीतर ही खराब हो गई। पीड़ित का कहना है कि मशीन खरीदते समय उन्हें बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक चलने का भरोसा दिया गया था, लेकिन कुछ ही समय में मशीन ने काम करना बंद कर दिया।
प्राप्त बिल के अनुसार यह खरीदारी 7 अक्टूबर 2025 को की गई थी। बिल में मशीन की कीमत लगभग 38 हजार 550 रुपये दर्ज है। हीमचंद्र का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद उन्हें खराब और संभवतः पुराना या एक्सपायरी सामान थमा दिया गया।
पीड़ित हीमचंद्र ने बताया कि जब वह मशीन को लेकर दुकान पर पहुंचे और दुकानदार से उसे बदलने या मरम्मत करने की बात कही, तो दुकान संचालक ने साफ इनकार कर दिया। आरोप है कि दुकानदार ने अभद्र भाषा में कहा कि हम न तो इसे बदलेंगे और न ही ठीक करेंगे, जो आपसे करते बने वह कर लीजिए।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। आसपास के कुछ लोगों का कहना है कि संबंधित दुकान पर पहले भी पुराने और खराब सामान बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि दुकान में एक्सपायरी और दोषपूर्ण सामान रखा जाता है, जिसे ग्राहकों को बेच दिया जाता है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब कोई ग्राहक शिकायत लेकर पहुंचता है तो उसे संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता। इस मामले ने क्षेत्र में दुकानदारों की जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी ग्राहक को खरीद के तुरंत बाद उत्पाद में खराबी मिलती है और दुकानदार उसे बदलने या ठीक करने से मना करता है, तो यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर मामला बन सकता है। पीड़ित उपभोक्ता जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है और बिल के आधार पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और उपभोक्ता विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है।


















लिखवाई और उसे थाने में जमा करा दिया। लेकिन उस तहरीर की कोई प्रति उन्हें नहीं दी गई। जब कुछ समय बाद उन्होंने तहरीर की छाया प्रति लेने की कोशिश की, तो उन्हें बताया गया कि मामला कोर्ट में भेज दिया गया है। प्रार्थी ने 26 नवंबर 2025 को थाना जाकर जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने 28 नवंबर 2025 को रजिस्ट्री के माध्यम से थाना अध्यक्ष को पत्र भी भेजा, लेकिन उसका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, 4 दिसंबर 2025 को दोबारा थाना जाने पर भी उन्हें तहरीर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। अब वे यह भी नहीं जान पा रहे हैं कि उनकी शिकायत किस न्यायालय में भेजी गई है, जिससे वे वहां जाकर उसकी प्रति प्राप्त कर सकें। पीड़ित पिता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि उन्हें यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए कि उनकी तहरीर किस कोर्ट में भेजी गई है, ताकि वे उसकी छाया प्रति प्राप्त कर सकें और आगे की कार्रवाई कर सकें। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एक व्यक्ति अपने परिवार के चार सदस्यों को खोकर पहले ही गहरे सदमे में है, वहीं दूसरी ओर उसे न्यायिक प्रक्रिया की बुनियादी जानकारी और दस्तावेज पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पीड़ित को कब तक राहत मिलती है।




