Home Blog Page 2

लुधियाना जिले के रायकोट तहसील के गांव फेरूराईं के रहने वाले बलजीत सिंह ने अपनी बहू और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं

0

उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटे इंद्रजीत सिंह की शादी बड़े अरमानों के साथ 12 सितंबर 2019 को गगनदीप कौर निवासी बाजाखाना, जिला फरीदकोट के साथ गुरुद्वारा रामसर साहिब पातशाही छठी, बाजाखाना में पूरी गुरमर्यादा के अनुसार करवाई थी।

बलजीत सिंह का कहना है कि बहू ने आईएल्ट्स की परीक्षा पास की हुई थी और इसी उम्मीद में उन्होंने करीब 25 लाख रुपये खर्च कर अपने बेटे और बहू को कनाडा भेजा। इसके लिए उन्होंने कर्ज लिया और अपनी जमीन तक बेच दी। उनका आरोप है कि कनाडा पहुंचने के बाद बहू गगनदीप कौर ने उनके बेटे से साफ कह दिया कि अब दोनों के रास्ते अलग हैं और उसका मकसद केवल कनाडा आना था। इसके बाद से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं।

पीड़ित पिता का कहना है कि जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्होंने बहू से फोन पर बात की, लेकिन उसने साथ रहने से इनकार कर दिया। जब खर्च किए गए पैसों की बात उठाई गई तो उसने कोई जवाब नहीं दिया और उनका नंबर ब्लॉक कर दिया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अभी तक कनाडा में स्थायी निवासी भी नहीं बन पाया है और मानसिक तनाव में जी रहा है।

बलजीत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बहू अपने मामा के बेटे के साथ रह रही है और उसके साथ उसके अवैध संबंध हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में जब उन्होंने बहू के पिता गुरसेवक सिंह से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने न तो मुलाकात की और न ही फोन उठाया।

पीड़ित का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक तंगी और तनाव के कारण उनका एक बेटा, जिसे वे मकान नहीं दिला सके, मानसिक दबाव में आकर दम तोड़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहू द्वारा विदेश से भेजे गए पैसों से उसके पिता ने अपनी संपत्ति बढ़ा ली, प्लॉट खरीदे और मेडिकल स्टोर तक खोल लिया, जबकि वे खुद कर्ज और गिरवी रखे सोने के बोझ तले दबे हुए हैं।

बलजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने केवल इस भरोसे पर शादी की थी कि बहू आईएल्ट्स पास है और उनके बेटे को विदेश ले जाकर दोनों मेहनत करेंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। लेकिन अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

T20 WC 2026: सेमीफाइनल की रेस हुई रोमांचक, जानें क्या है पूरा समीकरण?

0

T20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड सबसे पहले पहुंचने वाली टीम बन गई है। अब बाकी की 3 टीमों का तय होना बाकी है।T20 WC 2026 Semifinal Scenerio: T20 वर्ल्ड कप 2026 में रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान को हराकर इंग्लैंड ने सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया है, लेकिन अभी भी तीन स्पॉट बचे हुए हैं। अब नजरें ग्रुप-1 और ग्रुप-2 की बाकी टीमों पर टिकी हैं। दरअसल, सुपर-8 चरण में बाकी की 7 टीमें अंतिम चार में जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हैं, जिनमें भारत और पाकिस्तान जैसी टीमें भी शामिल हैं आइए जानते हैं बाकी तीन सेमीफाइनल स्पॉट के लिए क्या है पूरा समीकरण।ग्रुप 1 का समीकरण
साउथ अफ्रीका

साउथ अफ्रीका ने भारतीय टीम को बड़े अंतर से हराकर सुपर-8 में शानदार आगाज किया। ग्रुप-1 में वेस्टइंडीज ( 2 पॉइंट और NRR +5.350) टॉप पर है जबकि साउथ अफ्रीका 2 पॉइंट के साथ दूसरे स्थान पर है। टीम का नेट रन रेट +3.800 है। अब अफ्रीकी टीम के 2 मुकाबले बचे हैं। अगर साउथ अफ्रीका वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे दोनों को हरा देता है, तो वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। अगर दो में से एक मैच जीतता है, तो नेट रन रेट (NRR) निर्णायक बन सकता है, खासकर यदि तीन टीमें 4-4 पॉइंट्स पर फंसती हैं।

भारत
साउथ अफ्रीका से हारने के बाद भारतीय टीम की आगे की राह थोड़ी मुश्किल हो गई है। सुपर-8 के ग्रुप-1 में भारतीय टीम 0 पॉइंट के साथ तीसरे स्थान पर है। टीम का नेट रन रेट -3.800 है। अब टीम इंडिया के 2 मुकाबले बचे हैं। भारतीय टीम 26 फरवरी को जिम्बाब्वे और फिर 1 मार्च को वेस्टइंडीज से भिड़ेगी। ऐसे में टीम इंडिया को सेमीफाइनल का टिकट हासिल करने के लिए अपने बचे हुए दोनों मैच जीतने होंगे। इसके अलावा बाकी टीमों के मैचों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा।

अगर साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज को हरा देता है, तो भारत को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज दोनों के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी। अगर वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका को हरा दे और जिम्बाब्वे भी अफ्रीकी टीम को धूल चटा दे, तो भारत की दो जीत उसे सेमीफाइनल का टिकट दिला देगी। अगर साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज 2-2 मैच जीतते हैं, तो फिर भारत को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज को बड़े अंतर से हराना होगा।

वेस्टइंडीज
ग्रुप-1 की टॉपर वेस्टइंडीज के फिलहाल 2 पॉइंट है और नेट रन रेट भी +5.350 है। वेस्टइंडीज की टीम साउथ अफ्रीका और टीम इंडिया दोनों को हराते ही सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी। अगर साउथ अफ्रीका और भारत 2-2 जीत के साथ फिनिश करते हैं, तो फिर वेस्टइंडीज को कम से कम एक मैच बड़े अंतर से जीतना होगा ताकि बाकी टीमों से नेट रन रेट बेहतर रहे।

जिम्बाब्वे
वेस्टइंडीज से बुरी तरह हारने के बाद टूर्नामेंट में जिम्बाब्वे के ड्रीम रन में एक बड़ी रुकावट आई है, जिससे वे नेट रन-रेट पर भारत से और पीछे हो गए हैं। जिम्बाब्वे को अब सुपर-8 स्टेज से आगे बढ़ने के लिए टीम इंडिया और साउथ अफ्रीका दोनों को हराना होगा। साथ ही अन्य मैचों के नतीजे भी अपने पक्ष में आने की दुआ करनी होगी। ऐसी संभावना है कि 4-4 पॉइंट्स पर कई टीमें फंस सकती हैं, जहां फिर नेट रन रेट से फैसला होगा।

ग्रुप 2 का समीकरण
इंग्लैंड

पाकिस्तान को हराने के साथ ही इंग्लैंड सेमीफाइनल में पहुंच चुका है। इंग्लैंड ने लगातार 2 मैच जीत जीते हैं और अब टीम की कोशिश अगला मैच जीतते हुए ग्रुप-2 में टॉप पर फिनिश करने की होगी। इंग्लैंड पहली टीम बन गई है, जिसने लगातार 5वीं बार टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई है।

श्रीलंका

मेजबान श्रीलंका की टीम इंग्लैंड से बुरी तरह हारने के बाद ग्रुप-2 में सबसे निचले पायदान पर है। लंका के खात में 0 पॉइंट है और उसका नेट रन रेट -2.550 है। श्रीलंका को सेमीफाइनल में जाने के लिए न्यूजीलैंड और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी। एक भी हार उन्हें सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर करने के लिए काफी होगी।

पाकिस्तान
इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुका है, ऐसे में श्रीलंका और इंग्लैंड के खिलाफ न्यूजीलैंड की दो जीत पाकिस्तान का सेमीफाइनल में जाने का सपना तोड़ देगी। पाकिस्तान को सेमीफाइनल की रेस में बने रहने के लिए सुपर-8 के अपने आखिरी मैच में श्रीलंका के खिलाफ जीत जरूरी है। साथ ही उम्मीद करनी होगी कि श्रीलंका न्यूजीलैंड को हराए और इंग्लैंड भी न्यूजीलैंड को मात दे। अगर न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड को हरा देती है, तो पाकिस्तान को श्रीलंका को हराने के साथ बेहतर नेट रन रेट की भी जरूरत पड़ेगी। कीवी टीम की दो हार का मतलब है कि पाकिस्तान को सिर्फ श्रीलंका को हराना होगा। हालांकि, न्यूजीलैंड की एक हार सलमान अली आगा की टीम के लिए भी दरवाजा खोल देगी। ऐसे में फिर नेट रन रेट की लड़ाई होगी।

न्यूजीलैंड
अगर न्यूजीलैंड श्रीलंका और इंग्लैंड दोनों को हरा देता है तो वह ग्रुप-2 में टॉप पर फिनिश करेगा। यदि कीवी टीम श्रीलंका को हराकर इंग्लैंड से हार जीती है, तो फिर उसे पाकिस्तान के रिजल्ट और नेट रन रेट पर निर्भर रहना होगा। कुल मिलाकर, सेमीफाइनल की दौड़ बेहद रोमांचक हो चुकी है। इंग्लैंड के बाद कौन सी तीन टीमें अंतिम चार में पहुंचेंगी, यह आने वाले मुकाबलों के नतीजे सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

10वीं परीक्षा के दौरान छात्रा बनी मां, गणित का पेपर छोड़ गई बाथरूम; बच्चे को दिया जन्म

0

छात्रा गणित का पेपर देते समय शौचालय गई। लगभग 15 मिनट तक वापस नहीं लौटी तो एक महिला कर्मचारी को उसे देखने के लिए भेजा गया। बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था। अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां के सेक्टर-1 थाना क्षेत्र स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के एक निजी स्कूल में 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दे रही एक नाबालिग छात्रा ने परीक्षा केंद्र के बाथरूम में बच्चे को जन्म दिया।
गणित के पेपर के दौरान हुई घटना
छात्रा परीक्षा केंद्र पर गणित का पेपर दे रही थी। परीक्षा केंद्र प्रभारी नरेंद्र कुमार पोथे ने बताया कि छात्रा अचानक शौचालय जाने की बात कहकर अपनी सीट से उठी। जब वह करीब 15 मिनट तक वापस नहीं लौटी, तो संदेह होने पर एक महिला कर्मचारी को उसे देखने भेजा गया।

महिला कर्मचारी ने पाया कि बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था और अंदर से किसी नवजात बच्चे के रोने की आवाज आ रही थी। स्कूल प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और 108 एंबुलेंस को दी।

जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ
मौके पर पहुंची एंबुलेंस के जरिए छात्रा और नवजात को तुरंत पीथमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि 17 वर्षीय छात्रा और उसका बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।दो साल से चल रहा था प्रेम प्रसंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेक्टर-1 थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी उप निरीक्षक चांदनी सिंगार ने बताया कि छात्रा बेटमा थाना क्षेत्र की निवासी है। शुरुआती पूछताछ में छात्रा ने बताया कि वह कान्हा बर्मन नामक युवक के संपर्क में पिछले दो साल से थी। पिछले एक साल से उनके बीच शारीरिक संबंध थे, जिससे वह गर्भवती हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि बालिका के परिजनों को उसके गर्भवती होने की कोई जानकारी नहीं थी।

सेक्टर-1 थाना पुलिस ने पीड़िता के बयानों के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपी युवक कान्हा बर्मन की तलाश में जुटी है।

13 साल की शादी, तीन बेटी… फिर भी आधी रात बच्चों संग निकाली गई महिला: पति पर नशे और ससुराल पर मारपीट का आरोप

0

कैमूर। जिले के कर्मीचक गांव से एक विवाहिता को आधी रात तीन छोटे बच्चों के साथ घर से निकालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता रिमझिम देवी ने आरोप लगाया है कि 13 साल की शादी और तीन बेटी की मां होने के बावजूद उन्हें ससुराल पक्ष ने मारपीट कर घर से बाहर कर दिया। महिला का कहना है कि पति के नशे और परिवार की प्रताड़ना को वह वर्षों तक सहती रही, लेकिन अब हालात असहनीय हो गए हैं।

रिमझिम देवी, पत्नी चितु बिंद, निवासी ग्राम कर्मीचक, पोस्ट दरौ, थाना क्षेत्र भभुआ, जिला कैमूर (बिहार) की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति कपड़ा बनाने की मशीन चलाने का काम करते हैं और अधिकतर समय बाहर रहकर कमाई करते हैं। आरोप है कि पति शराब और गांजा जैसे नशे का सेवन करते हैं और जितनी कमाई होती है, उसे नशे में खर्च कर देते हैं। रिमझिम का कहना है कि उन्होंने कई बार मायके में भी पति को नशा करते अपनी आंखों से देखा है, लेकिन पति और परिवार की इज्जत के कारण वह चुप रहीं।

महिला ने बताया कि करीब चार महीने पहले की घटना है। रात करीब 12 बजे ससुराल पक्ष के लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि सिर्फ इस बात पर विवाद हुआ कि उन्होंने घर के पास रहने वाले एक युवक से सामान्य बातचीत कर ली थी। इसी बात को लेकर उन पर चरित्र पर सवाल उठाए गए और बेरहमी से पीटा गया।

रिमझिम देवी के अनुसार, ससुर कुंवर बिंद, सास जगमनी देवी, जेठानी कमलावती देवी, देवर बंटू कुमार और चंदेश्वर ने मिलकर उन्हें और उनके तीनों बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया। उस समय उनके पति बाहर काम करने गए हुए थे। महिला का कहना है कि मारपीट के बाद उन्हें मायके भेज दिया गया और तब से वह लगातार मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं।

पीड़िता का आरोप है कि उनका परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं है कि वह हर जगह न्याय के लिए भागदौड़ कर सके। तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और भविष्य को लेकर वह चिंतित हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें सुरक्षा और न्याय दिलाया जाए।

2000 रुपये के लेनदेन से शुरू हुआ विवाद, हत्या में फंसाने का आरोप: गाजियाबाद में मां ने उठाए पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल

0

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी देहात क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपने 25 वर्षीय बेटे अरुण कुमार को पड़ोसी अमरपाल की हत्या के झूठे आरोप में फंसाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित मां प्रेमवती पत्नी हरिश्चंद्र ने जिला अधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

29 दिसंबर की रात क्या हुआ?

घटना 29 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। प्रेमवती के अनुसार, उनके पड़ोसी अमरपाल ने अरुण को ₹2000 दिए क्योंकि वह काम करने गया था उसी के पुराने पैसे बाकी थे

रात करीब 8:30 बजे अरुण ने अमरपाल को 30 रुपये का डाटा रिचार्ज करने के लिए फोन किया। उस समय अमरपाल अपने भाई प्रदीप और दोस्त चंदन के साथ नया मोबाइल खरीदने जा रहा था।

करीब 9 बजे अमरपाल फोन खरीद कर तीनों वापस घर आ गए और घर के बाहर अलाव तापते रहे। आरोप है कि रात 9:30 बजे अमरपाल के पास किसी का फोन आया, जिसके बाद वह घर से निकल गया। रात 10 बजे तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजन उसे खोजने लगे। कुछ देर बाद घर के पास खाली प्लॉट में अमरपाल का शव मिला।

परिवार का कहना है कि अमरपाल अक्सर उस खाली प्लॉट में अपने साथियों के साथ बैठकर सिगरेट पीता और सट्टा खेलता था। प्रेमवती का आरोप है कि सट्टे से जुड़े किसी बड़े विवाद को दबाने के लिए उनके बेटे को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

30 दिसंबर को पुलिस ने उठाया

प्रेमवती के मुताबिक, 30 दिसंबर को दोपहर करीब 2 बजे पुलिस अरुण को उठाकर ले गई। उस समय वह गुज्जर चौक स्थित बादाम के गोदाम में काम कर रहा था, जहां चार गाड़ियां माल लेकर आई थीं। शाम 7:30 बजे मां को जानकारी मिली तो वह थाने पहुंची। आरोप है कि पुलिस ने सुबह तक छोड़ने का आश्वासन दिया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दवा देने से रोका, टॉर्चर का आरोप

मां का कहना है कि अरुण का पहले एक्सीडेंट हो चुका है, जिससे उसके सिर और पैरों में चोट थी। उसे नियमित दवाइयों की जरूरत थी। आरोप है कि पुलिस ने पहले दवा देने से मना कर दिया। आधी रात 12:30 बजे काफी अनुरोध के बाद दवा खिलाने दी गई।

प्रेमवती ने आरोप लगाया कि 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक अरुण को थाने में अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया गया। उसे उल्टा लटकाकर लाठियों से पीटा गया और डर के कारण उससे जबरन कबूलनामा कराया गया।

साक्ष्य गढ़ने का आरोप

परिवार ने थाना अंकुर विहार के एसएचओ योगेंद्र पंवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि मृतक के मोबाइल फोन पर अरुण के फिंगरप्रिंट लिए गए और वीडियो बनाकर उसे दोषी साबित करने की कोशिश की गई।

गोदाम मालिक पर भी सवाल

प्रेमवती का आरोप है कि गोदाम मालिक ब्रिजेश पंडित, जो दिल्ली पुलिस में कार्यरत बताए जाते हैं, ने सीसीटीवी फुटेज देने के बजाय टालमटोल की। गिरफ्तारी के समय अरुण के पास मौजूद 25 हजार रुपये और उसकी शादी में मिली गाड़ी भी पुलिस ने कब्जे में ले ली।

परिवार का आरोप है कि अब उन्हें धमकियां दी जा रही हैं कि यदि आगे कार्रवाई की तो पति को भी चोरी के केस में फंसा दिया जाएगा।

मां बोली— “मेरा बेटा निर्दोष है”

प्रेमवती का कहना है कि उनका बेटा पहले से पारिवारिक और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। उसकी शादी को दो साल हुए थे, एक बच्चा भी था जिसकी मौत हो चुकी है। वह परिवार का सहारा था।

मां ने जिला अधिकारी से निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की जांच और पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो निर्दोष युवक की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

फिलहाल पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस किसी भी प्रकार की कोई सुनवाई नहीं कर रही है ना ही कोई कार्यवाही कर रही है आप प्रेमवती अपने बेटे के इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है और उनका लगातार रो-रो कर बुरा हाल है वह उच्च अधिकारियों और प्रशासन से तुरंत मामले में संज्ञान लेकर न्याय दिलाने की मांग कर रही है ताकि समय रहते न्याय मिल सके और कोई बड़ी दुर्घटना होने से बचा जा सके

मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

फर्जी रजिस्ट्री कांड में गिरफ्तारी नहीं, आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक को सौंपा ज्ञापन; दो हफ्ते बाद भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

0

जमवारामगढ़।

तहसील क्षेत्र के ग्राम राहोरी में सामने आए कथित फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक को ज्ञापन सौंपकर मामले में त्वरित कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि 12 जून 2025 को एक सुनियोजित तरीके से मृत व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसी आधार पर करीब चार बीघा भूमि की रजिस्ट्री करा दी गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि सेवा शुल्क लेकर कुल छह लोगों ने मिलकर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन का नामांतरण करवाया। मामले की जानकारी उन्हें कई महीनों बाद मिली, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।

पीड़ितों के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को न्यायालय के आदेश के बाद जमवारामगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई। आरोप है कि पुलिस की ढिलाई से आरोपियों के हौसले बुलंद हैं और पीड़ित पक्ष को लगातार धमकियां मिल रही हैं।

ग्रामीणों ने विधायक महेंद्र पाल मीणा को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में सक्रिय फर्जीवाड़ा गिरोह का संकेत है, जिसने दस्तावेजों में हेराफेरी कर जमीनों पर कब्जे का खेल शुरू कर रखा है।

वहीं, थाना प्रभारी भगवान सहाय मीणा का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और प्रामाणिक दस्तावेज सामने आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अभी तक न तो किसी को हिरासत में लिया गया है और न ही कथित फर्जी दस्तावेजों की विस्तृत फोरेंसिक जांच की गई है।

गांव में इस पूरे प्रकरण को लेकर माहौल गरम है। लोगों का कहना है कि यदि मृत व्यक्ति के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री हो सकती है तो आम नागरिक की संपत्ति कितनी सुरक्षित है, यह बड़ा सवाल है। अब सबकी निगाहें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस फर्जी रजिस्ट्री कांड में सच सामने आएगा और आरोपियों तक कानून का शिकंजा पहुंचेगा या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

रिन्यूएबल एनर्जी में एमपी ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान किया आकर्षित’, बोले CM मोहन यादव

0

जबलपुर: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में सफल सहभागिता के बाद जबलपुर आने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का औद्योगिक एवं व्यापारी संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी प्रदेश की पहचान उसके केवल नक्शे से नहीं, बल्कि उपलब्धियों से भी होती है। आज मध्य प्रदेश अपनी प्रभावी नीतियों और उनके सफल क्रियान्वयन के कारण न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बना रहा है। प्रदेश औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से अग्रसर है और निवेश के लिए उद्यमियों को आकर्षित कर रहा है।

भारत निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के पहले की स्थिति अब पूरी तरह बदल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और आज दुनिया का हर देश व्यापार और निवेश के लिए भारत से जुड़ने को उत्सुक है।

रिन्यूएबल एनर्जी में MP पर बढ़ रहा भरोसा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में 200 से अधिक देशों ने भाग लिया, लेकिन सबसे अधिक फोकस भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर रहा। भारत सरकार के साथ-साथ देश के 10 राज्यों ने भी इस मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें मध्य प्रदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया। विशेषकर नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा एवं पॉवर सेक्टर के माध्यम से सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और मात्र 2 रुपये 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

उद्योगों की स्थापना पर 30% कैपिटल सब्सिडी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही है। उद्योगों की स्थापना पर 30 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है, वहीं एमएसएमई सेक्टर को 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि देश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज मध्य प्रदेश में खोले जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज खोलने के इच्छुक उद्यमियों को 25 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये की दर से उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में नीट के माध्यम से चयनित छात्रों को फीस भुगतान के लिए राज्य सरकार द्वारा ऋण सुविधा भी दी जाएगी।

पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां

भोपाल में साहित्य का उत्सव: ऊर्जा मंत्री के हाथों काव्य संग्रह का विमोचन, भावनाओं की डोर से बंधा शहर

0

भोपाल।
राजधानी भोपाल में शनिवार को साहित्य और संवेदनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे सांस्कृतिक परिदृश्य को जीवंत कर दिया। एजी पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित चर्चित लेखिका रीना यादुवेन्दु की काव्य कृति “एहसासों की डोर” का भव्य विमोचन एक गरिमामयी समारोह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, सिनेमा और प्रशासन जगत की नामचीन हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि समाज की आत्मा होती है। कविता मनुष्य के भीतर छिपी संवेदनाओं को आवाज देती है और ऐसे समय में, जब संवेदनशीलता कम होती जा रही है, इस तरह की कृतियाँ समाज को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का काम करती हैं।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुप्रसिद्ध लेखक इंद्रा डांगी, वरिष्ठ अभिनेता राजीव वर्मा, प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री रहात बद्र, आईएएस दिव्यांक सिंह सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने एक स्वर में “एहसासों की डोर” को भावनात्मक गहराई से भरपूर रचना बताया और इसे समकालीन कविता का सशक्त दस्तावेज कहा।

काव्य संग्रह “एहसासों की डोर” मानवीय रिश्तों, प्रेम, पीड़ा, उम्मीद और जीवन के सूक्ष्म भावों को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है। पुस्तक की एक खास पहचान इसकी रंगीन और कलात्मक चित्रण शैली है, जो कविताओं के भावों को दृश्य रूप देकर पाठकों को एक अलग ही अनुभूति से जोड़ती है।

प्रकाशक एजी पब्लिशिंग हाउस के संस्थापक योगेश शर्मा और सह-संस्थापक रक्षा बाजपेई ने लेखिका को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पुस्तक भावनात्मक साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एजी पब्लिशिंग हाउस का लक्ष्य केवल पुस्तक प्रकाशित करना नहीं, बल्कि ऐसे साहित्य को मंच देना है जो समाज से संवाद करे।

लेखिका रीना यादुवेन्दु ने मंच से सभी अतिथियों, प्रकाशक टीम और पाठकों का आभार जताते हुए कहा कि “एहसासों की डोर” उनके दिल की अनुभूतियों का प्रतिबिंब है। उन्होंने विश्वास जताया कि पाठक इन कविताओं में अपने जीवन के भावों की झलक जरूर पाएंगे।

कुल मिलाकर, “एहसासों की डोर” का यह विमोचन भोपाल के साहित्यिक इतिहास में एक यादगार और प्रेरणादायक क्षण बनकर उभरा, जहां शब्दों ने संवेदनाओं से हाथ मिलाया और साहित्य ने एक बार फिर अपनी ताकत का एहसास कराया।

दिल्ली में ग्रैप-III के उपाय लागू, AQI 400 पार पहुंचा, इन कामों पर लगा बैन

0

दिल्ली की हवा का स्तर बेहद खराब स्तर तक पहुंच गया है। लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। ऐसे में प्रशासन ने ग्रैप-III के उपाय लागू किए हैं।दिल्ली में हवा का स्तर बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। इससे निपटने के लिए ग्रैप-III के उपाय लागू कर दिए गए हैं। शनिवार सुबह दिल्ली का एक्यूआई 390 दर्ज किया गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद ग्रैप-III के उपाय लागू किए गए। सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर के आधार पर दिल्ली और आसपास के एनसीआर में जीआरएपी के तहत प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। हालांकि, सर्दी के दौरान दिल्ली की औसतन बेहद खराब रहती है। डॉक्टरों के अनुसार इससे फेफड़ों और हृदर को गंभीर नुकसान हो सकता है।

जीआरएपी के चार चरण
जीआरएपी वायु गुणवत्ता को चार चरणों में वर्गीकृत करता है। चरण 1 (खराब, एक्यूआई 201-300), चरण 2 (बहुत खराब, एक्यूआई 301-400), चरण 3 (गंभीर, एक्यूआई 401-450) और चरण 4 (गंभीर से भी अधिक, एक्यूआई 450 से ऊपर)। एक्यूआई की मात्रा बढ़ने के साथ ग्रैप के उपाय बढ़ते जाते हैं और कई तरह के कामों में बैन लग जाता है।

इन कामों पर लगी रोक
जीआरएपी-3 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों में गैर-जरूरी निर्माण और विध्वंस कार्यों के साथ-साथ पत्थर तोड़ने और खनन गतिविधियों पर रोक शामिल है। इसके अंतर्गत दिल्ली में पुराने डीजल मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध है, जबकि कक्षा 5 तक के स्कूल हाइब्रिड मोड में स्थानांतरित हो गए हैं और दिल्ली-एनसीआर में कार्यालय 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर सकते हैं।

वजीरपुर की हालत सबसे खराब
शनिवार की सुबह, राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। वजीरपुर की हालत सबसे खराब रही। यहां का एक्यूआई 443 था। जहांगीरपुरी में 439 और विवेक विहार में 437 एक्यूआई दर्ज किया गया। अन्य क्षेत्रों में आनंद विहार (435), बुराड़ी क्रॉसिंग (415), चांदनी चौक (419), गाजीपुर (435), जहांगीरपुरी (442), आरके पुरम (404) और रोहिणी (436) ऐसे केंद्र रहे, जहां एक्यूआई 400 से ज्यादा रहा।

पन्ना, बैतूल, कटनी और धार में बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज, CM मोहन यादव ने की चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक

0

CM मोहन यादव ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की है। सीएम ने इस दौरान अधिकाधिक अस्पतालों और डॉक्टर्स को आयुष्मान योजना से जोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को प्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए तैयार करने को भी कहा है।भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल परिवर्तन लाना ही सरकार की मंशा है। स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और चिकित्सा शिक्षा के व्यापक विस्तार के लिए सरकार बहुस्तरीय सुधार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकाधिक नागरिकों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाया जाए। जो अस्पताल या डॉक्टर आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करते हैं या इस योजना में इम्पैनल्ड नहीं है, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर्स की आपूर्ति के लिए विभाग भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए। यह प्रयास किया जाए कि फील्ड में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के संचालन के लिए निजी चिकित्सकों की भी सेवाएं ली जाए। इसके लिए उन्हें कॉल पर बुलाने के अलावा अच्छा मानदेय (इन्सेंटिव) भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे विद्यार्थी, जिनकी फीस सरकार द्वारा अदा की जा रही है, ऐसे बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए रोका जाए। ऐसे डॉक्टर्स को प्रदेश के जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए इन्हें भी आकर्षक मानदेय राशि दी जाए।
अधिक संख्या में डॉक्टर्स की आवश्यकता- मोहन यादव
मुख्यमंत्री मोहन यादन ने कहा कि प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेजेस स्थापित हो रहे हैं, ऐसे में अधिक संख्या में डॉक्टर्स की आवश्यकता होगी। बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को प्रमोट कर, इनके मानदेय का रिवीजन कर सभी नए मेडिकल कॉलेजेस एवं फील्ड के अस्पतालों में इनकी सेवाएं ली जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सहित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और संचालित गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल, राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) नीरज मंडलोई भी उपस्थित थे।

बॉन्ड वाले डॉक्टर्स शासकीय डॉक्टर्स के रूप में भर्ती होंगे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों तक इनका लाभ समय पर और प्रभावी रूप से पहुंचे, इसके लिए डिलेवरी सिस्टम को और मजबूती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने फील्ड अमले की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि फील्ड स्तर पर संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही से ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि विभागीय सेवाओं का समन्वय और योजनाबद्ध क्रियान्वयन ही सरकार की लक्ष्य पूर्ति का वास्तविक माध्यम है। बैठक में बताया गया कि बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को शासकीय डॉक्टर्स के रूप में भर्ती करने के लिए, इनके भर्ती नियम संशोधित किए जा रहे हैं। इसके लिए जल्द ही मंत्रीपरिषद की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।

सीजेरियन आपरेशन पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए- मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेजेस की स्थापना के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवती माताओं का बेवजह सीजेरियन आपरेशन करने की शिकायत आती रहती हैं, इस पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस के चालकों द्वारा ज़बरदस्ती मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाने की शिकायत भी आती हैं, इसकी सख्ती से निगरानी करें और ऐसी प्रवृत्ति को रोकें। बताया गया कि बीते दो साल मे 84000 से अधिक कार्डियक सर्जरी शासकीय अस्पतालों में हुई है। प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में शासकीय अस्पतालों में कार्डियक सर्जरी बहुत कम खर्चे में होती है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय व्यवस्थाओं की सराहना की। बताया गया कि प्रदेश में देहदान करने वाले 38 मृतकों को गॉड आफ ऑनर दिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बेहद अच्छी योजना है और पूरे समाज के बीच इसे बेहद प्रमुखता से प्रचारित किया जाना चाहिए।

मेडिकल टूरिज्म हब बनेगा एक जिला
बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि अगले तीन सालों में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सीएम-केयर योजना के सफल क्रियान्वयन को कार्ययोजना में ले लिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 की समाप्ति तक राजगढ़, मंडला, छतरपुर, उज्जैन, दमोह एवं बुधनी में निर्माणाधीन गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज प्रारंभ कर देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर तैयार किए जाने वाले सभी मेडिकल कॉलेजेस का निर्माण कार्य भी इसी अवधि के दौरान पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश के एक जिले को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य लिया गया है। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालय में कैथलैब की स्थापना भी वर्ष 2028 तक कर दी जाएगी। वर्ष 2028 तक मातृ मृत्यु दर 100 प्रति लाख जीवित जन्म करने का लक्ष्य लिया गया है। उन्होंने बताया कि खाद्य प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए FSSAI द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए 41.07 करोड़ रुपए की कार्ययोजना मंजूर कर दी गई है। इसी प्रकार औषधि प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए 211 करोड़ रुपए की लागत से 5 साल की कार्ययोजना बनाकर CDSCO को भेज दी गई है। इसमें उल्लेखित सभी पूंजीगत कार्य 3 साल की समय-सीमा में पूरे कर लिए जाएंगे।

बीते दो वर्ष की विभागीय उपलब्धियां
बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव द्वारा बीते दो वर्षों में विभाग को मिली उपलब्धियों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में नवाचार की दृष्टि से निजी निवेशकों को अस्पताल के निर्माण के लिए एक रुपए में जमीन देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। निजी निवेशकों के सहयोग से पीपीपी मोड पर कटनी, धार, पन्ना और बैतूल जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर ही 9 जिलों अशोक नगर, मुरैना, सीधी, गुना, बालाघाट, भिंड, टीकमगढ़, खरगौन एवं शाजापुर में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए निविदा की कार्रवाई प्रचलित है। इनके लिए द्वितीय निविदा 24 दिसंबर 2025 तक आमंत्रित की गई हैं। उन्होंने बताया कि –

पीपीपी मोड पर प्रदेश में 4 नए मेडिकल कॉलेज पन्ना, बैतूल, कटनी और धार के निर्माण के लिये भूमि-पूजन जल्द ही किया जाएगा।
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा करेंगे इन मेडिकल कॉलेजेस के निर्माण का भूमिपूजन।
वित्त वर्ष 2003-04 में मध्यप्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, वर्ष 2025-26 में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजेस की संख्या बढ़कर 52 हो गई है।
मेडिकल कॉलेज सतना से संबंद्ध नवीन चिकित्सालय 383 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। इसका भूमिपूजन जल्द ही किया जाएगा।
प्रदेश में 14 नये नर्सिंग कॉलेज खुलेंगे।
भोपाल एवं रीवा में कार्डिएक कैथलैब प्रारंभ, ग्वालियर एवं जबलपुर में भी कैथलैब जल्द ही खोलने की तैयारी।
बॉन्ड वाले 2500 डाक्टर्स जल्द ही उपलब्ध होंगे।
इन्हें प्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए तैयार किया जाये।
हास्पिटल खोलने के लिए निवेशकों को 1 रूपये में जमीन देने के मामले में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी
ऐसा नवाचार करने में देश का पहला राज्य है मध्यप्रदेश।
रेडियोथैरेपी सुविधाओं के लिए मेडिकल कॉलेज इंदौर, जबलपुर, रीवा एवं ग्वालियर में 50 करोड़ प्रति मशीन की लागत से आधुनिक ड्यूल एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर मशीन खरीदी जा रही हैं।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा एवं सागर मेडिकल कॉलेज में सीटी स्केन (9 करोड रूपए प्रति मेडिकल कॉलेज) एवं एम.आर.आई. मशीनें (14 करोड़ रूपए प्रति मेडिकल कॉलेज) स्थापित की जा रही है। मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, रतलाम एवं विदिशा के लिए भी ऐसी ही मशीनें खरीदी जाएंगी।
मेडिकल कॉलेज भोपाल, इंदौर, रीवा एवं सागर में रेडियोथैरेपी सुविधाओं के विस्तार के लिए ब्रेकीथेरिपी मशीनें खरीदने के लिए इन सभी मेडिकल कॉलेजेस को 7-7 करोड़ रूपए दिए जा रहे हैं।
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की संख्या 14 से बढ़कर 19
प्रमुख सचिव ने बताया कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की संख्या 14 से बढ़कर अब 19 एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालय की संख्या 12 से बढ़कर अब 14 हो गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा इंदौर में ईएसआईसी (ESIC) चिकित्सा महाविद्यालय (50 सीटर) भी प्रारंभ किया गया है। महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर से संबंद्ध महाराजा यशवंत राव चिकित्सालय परिसर में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए 773.07 करोड रुपए तथा मेडिकल कॉलेज रीवा में भी विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए 321.94 करोड रुपए मंजूर किए गए हैं। बताया गया कि प्रदेश के तीन नए जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना में नए जिला चिकित्सालय के निर्माण के लिए मंजूरी दे दी गई है। टीकमगढ़, नीमच, सिंगरौली, शिवपुरी एवं डिंडोरी के जिला चिकित्सालय का उन्नयन करते हुए कुल 800 बिस्तरों की वृद्धि की गई है और इसके लिए 810 नए पदों पर भर्ती की मंजूरी भी दे दी गई है।

मातृ मृत्यु दर 173 से कम होकर 142
प्रमुख सचिव ने बताया कि मई 2024 से प्रारंभ हुई पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा में अबतक 109 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया। जुलाई 2025 से प्रारंभ की गई शव परिवहन सेवा के जरिए अबतक 6308 शवों का परिवहन किया गया। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालय में जन औषधि केंद्रों की स्थापना कर दी गई है। शासकीय औषधि वितरण में जीएस-1 प्रणाली का क्रियान्वयन किया जा रहा है। बताया गया कि एसआरएस 2018-20 में जारी की गई तुलना में मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से कम होकर 142 तथा शिशु मृत्यु दर 41 से कम होकर 37 हो गई है।

टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम में मध्यप्रदेश टॉप 5 में
प्रमुख सचिव ने बताया कि नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम में मध्यप्रदेश देश के टॉप फाइव परफॉर्मर स्टेटस में से एक है। सिकल सेल स्क्रीनिंग मे भी मध्यप्रदेश ने देश में अव्वल प्रदर्शन किया है। अबतक कुल 1 करोड़ 25 लाख 38 हजार 125 सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर एकीकृत उपचार केन्द्रों की स्थापना, भोपाल एवं इंदौर में सेंटर ऑफ कॉम्पीटेन्स तथा प्री-नेटल जांच के लिए मेडिकल कॉलेज रीवा में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 12 हजार 655 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 448 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक, 72 मोबाइल मेडिकल यूनिट और 148 शव वाहन संचालित किए जा रहे हैं।