मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मार्च के अंतिम सप्ताह से गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी (purchase at support price) शुरू होगी। करीब 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी के हिसाब से तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन प्रदेश के 176 गोदामों पर न तो उपार्जन होगा और न ही इनमें गेहूं का भंडार किया जाएगा। कीट लगा खाद्यान्न रखने, सेंट्रल पूल के लिए भारतीय खाद्य निगम को खाद्यान्न देने में आनाकानी करने, समय पर न खोलने सहित अन्य गड़बड़ियों के कारण 176 गोदामों को ब्लैक लिस्टेड (176 warehouses blacklisted) कर दिया गया है।
यह कार्रवाई भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India) के निर्देश पर गुरुवार को मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिंग कॉर्पोरेशन (राज्य भंडार गृह निगम) द्वारा की गई है। प्रदेश के जिन 176 वेयरहाउस और गोदाम को ब्लैक लिस्टेड किया है, उनमें खंडवा जिले के दो वेयरहाउस शामिल हैं। एक पुनासा के पास पामाखेड़ी का मां नर्मदा वेयरहाउस है, जहां एफसीआई ने एप्रोच रोड की समस्या बताई। वहीं दूसरा वेयरहाउस खालवा का दिव्यशक्ति है, जो जनजातीय मंत्री कुंवर विजय शाह का है। इस वेयरहाउस में तौलकांटे में गड़बड़ी होना बताया गया है।
गौरतलब है कि जबलपुर के गोदामों में गुणवत्ताहीन धान पाए जाने के मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पिछले दिनों उपार्जन नीति को लेकर आयोजित बैठक में भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों ने बताया था कि कुछ गोदाम संचालकों द्वारा सेंट्रल पूल में खाद्यान्न का उठाव करने में अवरोध उत्पन्न किया गया। गोदामों को समय पर नहीं खोला, पहुंच मार्ग को जानबूझकर खराब किया और कीटोपचार नहीं किया गया। परिणाम यह हुआ कि गोदामों में रखा खाद्यान्न कीटग्रस्त हो गया।
निगम ने ऐसे गोदामों की सूची देते हुए इनमें उपार्जन केंद्र न खोलने और भंडारण नहीं करने के लिए निर्देशित किया था। इस आधार पर राज्य भंडार गृह निगम ने गुरुवार को सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा कि वर्ष 2024-25 में गेहूं उपार्जन के दौरान उन गोदामों में न तो उपार्जन केंद्र खोले जाएं और न ही भंडारण किया जाए, जिन पर भारतीय खाद्य निगम ने आपत्ति जताई गई है। दरअसल, सेंट्रल पूल में समय पर परिदान न होने से खाद्यान्न के खराब होने की आशंका होती है और उसका पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार के ऊपर आता है।
ब्लैक लिस्टेड प्रमुख गोदाम
भोपाल- मूलचंद, ज्ञानवी, गिरिधर, बीएम और राजेश्वरी वेयरहाउस।
इंदौर – तुलसी नारायण गर्ग साइलो, ज्योति मिल, लक्ष्य, रघुवंश एग्रो फूड साइलो।
उज्जैन – चंदप्रभा, भवानी, नफीस, बालाजी, मंगलमूर्ति, याारदा, रिद्धि सिद्धी, राम बा, श्रीराम, चामंडेश्वरी, मधुसूदन, चंद्रावत, सदगुरु, रूद्र और महाकालेश्वर, शारदा, मां आशापुर और वैष्णव साइलो।
जबलपुर – स्पर्श, बेनी माधव, मां विद्या, राधिका, अन्नपूर्णा, नसीम एंड संस, शिवेरी, श्री सरस्वती, श्रीकृष्ण, वीके और नर्मदा एग्रो लाजिस्टिक्स।













शादी के तीन माह तक ठीक रहने के बाद तैयबा को उसके पति व चाचा ससुर भी बहुत परेशान करता हैं, देवर मोनू कई बार मारपीट करता हैं और अश्लील हरकतें भी करता हैं और उस मास खिलाता हैं , डेढ़ सास आदि ने सामान और रुपए के लिए प्रताड़ित करना शुरू किया। अपने मायके से अपने साथ चार पहिया गाड़ी, 80 हजार रुपए सबके लिए मंहगे कपड़े, साड़ियाँ (रिश्तेदारों को बांटने के लिए) लाना होगा यह कहकर ताने देने लगे। प्रताड़ना की बात युवती ने अपने पिता को बताई तो उन्होंने लड़की के ससुराल बर्तन व 80 हजार रुपए और नवम्बर में 120000 ससुराल पक्ष को भिजवाए थे। इसके बाद पति, सास-ससुर व अन्य लोगों ने चार पहिया वाहन अब तक नहीं दिए जाने की बात सुनाते हुए परेशान करना शुरू किया। इसके बाद युवती के सम्बंध पति समेत ससुराल के अन्य सदस्यों से बिगड़ने लगे। अपने मां-पिता, भाई व अन्य लोगों के दबाव में दहेज के लिए अवलेश अली अक्सर अपनी पत्नी को परेशान करने लगा और फिर घर से निकाल दिया। समाज के लोगों ने सुलह की कोशिश की लेकिन किसी की बात का युवती के ससुराल वालों पर कोई असर नहीं हुआ। पंचायत बुलाई गई लेकिन पति व अन्य लोग बीच में ही उठकर चले गए। आखिरकार युवती के परिजन ने थाने का सहारा लिया। पीडि़ता द्वारा थाना में दिए गए आवेदन पत्र की पश्चात भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। तैयबा के एक साल का बेटा भी हैं अब उसके भविष्य का क्या।

