6.9 C
Munich
Monday, November 2, 2026

पर्वत उठाने वाले बयान पर बढ़ा विवाद, धीरेंद्र शास्त्री ने श्रीकृष्ण भक्तों से मांगी माफी

Must read

छतरपुर

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने हाल ही में दिए गए बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिस पर विवाद खड़ा हो सकता है। 29 अक्तूबर को शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने कहा- हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुर जी का नाम भी टेढ़ा, चलना भी टेढ़ा और खड़े भी तीन जगह से टेढ़े होते हैं।

शास्त्री ने कथा के दौरान भगवान कृष्ण की बांसुरी बजाने और गोवर्धन पर्वत उठाने की लीलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना कोई बड़ी बात नहीं है, कलाकार भी बांसुरी बजा लेते हैं। गाय चराना भी खेल है, लेकिन बंदरों को नचाना खेल नहीं है। उन्होंने भगवान हनुमान का उदाहरण देते हुए कहा- तुम्हारे वाले पर्वत उठा लेते हैं, इसमें क्या बड़ी बात है, हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। उनका इशारा संजीवनी बूटी के लिए पर्वत उठाकर लाने वाले हनुमान जी की ओर था।

राम और कृष्ण की मुद्रा को लेकर की तुलना
कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण की तस्वीरों में वे कहीं कमर लचकाए तो कहीं पैरों पर पैर रखकर बांसुरी बजाते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा- हमारे राम तो एकदम सीधे खड़े होते हैं। हमारे भगवान का नाम भी सीधा, चलना भी सीधा और दिखते भी सीधे हैं। वहीं, तुम्हारे ठाकुर जी का नाम भी टेढ़ा और उनकी मुद्रा भी टेढ़ी होती है।

उन्होंने भगवान राम के धनुष चलाने की तुलना भगवान कृष्ण की बांसुरी से करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना खेल हो सकता है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं है। हालांकि, बयान के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे भगवान कृष्ण के विरोधी हैं।

यादव समाज ने जताई नाराजगी
इसी टिप्पणी को लेकर भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों एवं यादव समाज के लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन धर्म के आराध्य एवं पूजनीय स्वरूप हैं। दोनों की लीलाएं, आदर्श और जीवन दर्शन अपने-अपने स्थान पर विशेष महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों आराध्य स्वरूपों की तुलना करते हुए की गई टिप्पणी से भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं।

इस कथित टिप्पणी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। यादव समाज सहित भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों और श्रद्धालुओं द्वारा इस विषय पर अपनी नाराजगी व्यक्त की जा रही है। 

यादव समाज के शिवपुरी निवासी रामकुमार यादव का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण (ठाकुर जी) के बारे में टिप्पणी करने वाले पं. धीरेंद्र शास्त्री का पूरे समाज को विरोध करना चाहिए। हम इस तरह की टिप्पणी को सनातन धर्म के विरुद्ध मानते हैं। उन्होंने मांग की कि पं. धीरेंद्र शास्त्री की कथा कहीं भी आयोजित नहीं कराई जानी चाहिए। साथ ही, जिस व्यक्ति ने यह कथा आयोजित कराई थी, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि इसमें ठाकुर जी के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है।

बागेश्वर बाबा ने मांगी माफी
जब मामले ने तूल पकड़ा तो पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मुद्दे पर सफाई भी दी है और माफी भी मांगी है। उन्होंने कहा कि हमारे भाव को गलत समझा गया। उन्होंने कहा कि वे खुद ठाकुर जी के भक्त हैं व भागवत कथा के दौरान ठाकुर जी का गुणगान करते हैं। एक संत का प्रचलित पद है, जिसमें कहा गया है कि बांसुरी बजाना तो खेल भी है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं है। वे इसी पद की व्याख्या कर रहे थे। विनोद में कहीं बातों का “अर्थ का अनर्थ” न बनाएं। 

प्रदीप मिश्रा के राधारानी पर बयान से भी हुआ था विवाद
धार्मिक कथाओं के दौरान देवी-देवताओं को लेकर की गई टिप्पणियों पर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। जून 2024 में कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने राधारानी के विवाह को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि राधारानी का विवाह भगवान कृष्ण से नहीं, बल्कि मथुरा के छाता निवासी अनय घोष से हुआ था। इस बयान के बाद विवाद बढ़ा तो प्रदीप मिश्रा ने बरसाना स्थित राधारानी मंदिर पहुंचकर नाक रगड़कर माफी मांगी थी।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article