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Sunday, November 1, 2026

कभी एक अस्पताल और गिने-चुने कॉलेज, आज उद्योगों और सुविधाओं का विस्तार; नेताओं ने याद किए पुराने दिन

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हरियाणा
 एक नवंबर 1966 को हरियाणा ने अलग राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई। उसी वर्ष जन्मीं सीमा त्रिखा, शशि रंजन परमार और नैना चौटाला ने भी इसी धरती पर आंखें खोलीं। छह दशक बाद इनके अनुभवों में प्रदेश के बदलते स्वरूप की कहानी दर्ज है।

किसी ने खेती से उद्योगों तक बढ़ती गतिविधियां देखीं, किसी ने सरकारी कामकाज में बदलाव महसूस किया तो किसी की स्मृतियों में वह हिसार बसा है, जहां अस्पताल और कॉलेज गिने-चुने थे।

हरियाणा दिवस पर दैनिक जागरण की इस विशेष प्रस्तुति में पढ़िए, इन तीनों राजनेताओं की जुबानी उस प्रदेश की कहानी, जिसने छह दशक में अपनी पहचान और विस्तार दोनों को नया रूप दिया।

जब हिसार में एक ही अस्पताल और कॉलेज था- नैना चौटाला
पूर्व विधायक नैना चौटाला का जन्म 15 अक्टूबर 1966 को हिसार के दरौली गांव में हुआ था। हरियाणा के गठन से कुछ दिन पहले जन्मीं नैना ने अपने बचपन में हिसार का वह स्वरूप देखा, जहां आज जैसी सुविधाएं नहीं थीं।

उनके अनुसार, उस समय शहर में एक ही अस्पताल था और कालेज भी गिने-चुने थे। आज अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ी है और शहर का विस्तार हुआ है। नैना बताती हैं कि बचपन में पढ़ाई और खेलकूद के अवसर सीमित थे। वह स्वयं निशानेबाजी से जुड़ी थीं। उनके अनुभव में उस दौर में खिलाड़ियों को आज जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं।

अब हरियाणा के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रदेश के शहरी विकास का उल्लेख करते हुए वह गुरुग्राम और फरीदाबाद का उदाहरण देती हैं। दोनों शहरों का विस्तार हुआ है और वे बड़े शहरी केंद्रों के रूप में उभरे हैं। अनाज उत्पादन में भी हरियाणा की अलग पहचान बनी है।

नैना चौटाला के जीवन का एक सामाजिक पहलू यह भी है कि चौटाला परिवार की महिलाओं का राजनीति में आना पहले सामान्य बात नहीं थी। खुद उनके शब्दों में वह चौटाला परिवार की पहली महिला थीं, जिन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। उनके अनुसार व्यापक बदलाव शिक्षा, खेल और महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों का है।

खेतों से उद्योगों तक बदली प्रदेश की पहचान- सीमा त्रिखा
पूर्व विधायक सीमा त्रिखा ने कहा कि हरियाणा की पहचान खेती, सैनिकों की शहादत और खेलों में उपलब्धियों से जुड़ी रही है। प्रदेश गठन के बाद छह दशक में इन क्षेत्रों के साथ आर्थिक गतिविधियों का भी विस्तार हुआ। सीमा त्रिखा के अनुसार, कृषि के साथ उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़े और दूसरे राज्यों के लोग भी काम की तलाश में हरियाणा आने लगे।

दिल्ली से तीन ओर से घिरे होने के कारण प्रदेश पर राजधानी के सामाजिक और आर्थिक बदलावों का भी असर पड़ा। वह कहती हैं कि अलग-अलग सरकारों ने अपने समय में प्रदेश के विकास में योगदान दिया।

अब सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण से बिचौलियों की भूमिका कम करने का प्रयास हुआ। उनके अनुभव में हरियाणा का बदलाव केवल खेती और उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी सेवाओं और सामाजिक अवसरों में आए परिवर्तन में भी दिखाई देता है।

नौकरी और बदली के लिए नेताओं के पास लगती थी भीड़ -शशि रंजन परमार
पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने कहा कि हरियाणा के गठन के समय प्रदेश विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ था। शशि रंजन परमार के अनुसार, छह दशक में सड़क, सिंचाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ।

पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के कार्यकाल में सड़कों और नहरों के निर्माण को गति मिली। बाद की सरकारों ने भी विकास कार्य किए। वह मानते हैं कि आज का हरियाणा कई सरकारों के प्रयासों का परिणाम है। परमार के अनुसार, सरकारी कामकाज में व्यक्तिगत सिफारिश के बजाय नियमों और नीतियों की भूमिका बढ़ी है।

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