फर्जी रजिस्ट्री कांड में गिरफ्तारी नहीं, आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक को सौंपा ज्ञापन; दो हफ्ते बाद भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

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जमवारामगढ़।

तहसील क्षेत्र के ग्राम राहोरी में सामने आए कथित फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक को ज्ञापन सौंपकर मामले में त्वरित कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि 12 जून 2025 को एक सुनियोजित तरीके से मृत व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसी आधार पर करीब चार बीघा भूमि की रजिस्ट्री करा दी गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि सेवा शुल्क लेकर कुल छह लोगों ने मिलकर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन का नामांतरण करवाया। मामले की जानकारी उन्हें कई महीनों बाद मिली, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।

पीड़ितों के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को न्यायालय के आदेश के बाद जमवारामगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई। आरोप है कि पुलिस की ढिलाई से आरोपियों के हौसले बुलंद हैं और पीड़ित पक्ष को लगातार धमकियां मिल रही हैं।

ग्रामीणों ने विधायक महेंद्र पाल मीणा को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में सक्रिय फर्जीवाड़ा गिरोह का संकेत है, जिसने दस्तावेजों में हेराफेरी कर जमीनों पर कब्जे का खेल शुरू कर रखा है।

वहीं, थाना प्रभारी भगवान सहाय मीणा का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और प्रामाणिक दस्तावेज सामने आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अभी तक न तो किसी को हिरासत में लिया गया है और न ही कथित फर्जी दस्तावेजों की विस्तृत फोरेंसिक जांच की गई है।

गांव में इस पूरे प्रकरण को लेकर माहौल गरम है। लोगों का कहना है कि यदि मृत व्यक्ति के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री हो सकती है तो आम नागरिक की संपत्ति कितनी सुरक्षित है, यह बड़ा सवाल है। अब सबकी निगाहें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस फर्जी रजिस्ट्री कांड में सच सामने आएगा और आरोपियों तक कानून का शिकंजा पहुंचेगा या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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