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Thursday, November 5, 2026

सत्ता में आने के बाद पीछे छूटे पुराने चेहरे, सीएम नायब सैनी ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद

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चंडीगढ़
 राजनीति में सत्ता का सफर जितना महत्वपूर्ण होता है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उन लोगों का योगदान होता है, जो कठिन दौर में किसी संगठन की नींव मजबूत करते हैं।

हरियाणा भाजपा में भी ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने उस समय पार्टी का झंडा उठाया, जब सत्ता तो दूर, चुनाव जीतना भी बड़ी चुनौती हुआ करता था।

आज प्रदेश में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार है, लेकिन संगठन के इस सफर के कई पुराने सारथी धीरे-धीरे राजनीतिक गतिविधियों से दूर होते चले गए। बुधवार को गुरुग्राम में आयोजित वरिष्ठ कार्यकर्ता सम्मेलन ने इन्हीं लोगों को फिर से केंद्र में ला दिया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तीन दशक और उससे अधिक समय तक संगठन के लिए काम करने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इनमें पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व पदाधिकारी और संगठन की अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा चुके कार्यकर्ता शामिल थे।

कभी पार्टी की चुनावी लड़ाई का चेहरा रहे इन नेताओं को जब मुख्यमंत्री ने सम्मान दिया और उनके अनुभव सुने तो कई लोगों की आंखें खुशी से नम हो गईं। उनके लिए यह महज एक बैठक नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सफर की पहचान थी, जिसमें उन्होंने अपना समय और ऊर्जा लगाई थी।

इस पहल के पीछे हरियाणा भाजपा की प्रभारी स्मृति इरानी का संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 22-23 अक्टूबर को पंचकूला में हुई संगठनात्मक बैठकों के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा था कि पार्टी को उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने मुश्किल समय में संगठन को खड़ा किया। आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसमें इन पुराने कार्यकर्ताओं की मेहनत और संघर्ष की बड़ी भूमिका है।

सत्ता के साथ बदले समीकरण, अनुभव को फिर मिलेगी जगह
साल 2014 से पहले हरियाणा में भाजपा अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई थी। गठबंधन के दौर में पार्टी का विस्तार सीमित था। उस समय जिलाध्यक्ष से लेकर विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी तक संगठन की जिम्मेदारी संभालते और सीमित संसाधनों में पार्टी का आधार बढ़ाते थे। सत्ता में आने के बाद नई पीढ़ी और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच कई पुराने चेहरे पीछे छूट गए।

मुख्यमंत्री नायब सैनी की गुरुग्राम में हुई मुलाकात को इसी दूरी को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसका महत्व केवल पुराने लोगों को सम्मान देने तक सीमित नहीं है। संगठन के पास उनका क्षेत्रीय अनुभव, कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों की समझ भी है।

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