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गजब हो गया! सऊदी अरब में पहली बार पड़ी बर्फ, देखकर दंग रह गए लोग

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सऊदी अरब से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। आम तौर पर अपने रेगिस्तान के लिए जाने जाने वाले सऊदी अरब के कुछ हिस्सों में इतिहास में पहली बार भारी बारिश और बर्फबारी देखी जा रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो अल-जौफ क्षेत्र में हाल ही में भारी बर्फबारी हुई, जिससे देश में एक शीतकालीन वंडरलैंड का निर्माण हुआ, जो आमतौर पर अपनी शुष्क जलवायु के लिए जाना जाता है। यह अभूतपूर्व बर्फबारी क्षेत्र में शुरू हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि की श्रृंखला के बाद हुई।

हैरान रह गए स्थानीय लोग

बताया जा रहा है कि अल-जौफ इलाके के लोग जब सुबह उठे तो उन्होंने सफेद बर्फ का आश्चर्यजनक नजारा देखा। सऊदी प्रेस एजेंसी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यहां न केवल बर्फबारी हुई, बल्कि झरने भी बने, घाटियां फिर से पुनर्जीवित हो गईं और इलाके को जीवन से भर दिया। सर्दियों जैसा दिखने वाला यह नजारा एक बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि देश सर्दियों में प्रवेश कर रहा है, जिससे खूबसूरत वसंत ऋतु का मार्ग प्रशस्त हो रहा है जिसके लिए अल-जौफ प्रसिद्ध है।

आने वाले दिनों में खराब रहेगा मौसम

हालांकि, सऊदी मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में लगातार खराब मौसम की चेतावनी जारी की है। अल-जौफ के लोग अधिकांश हिस्सों में तूफान की उम्मीद भी कर सकते हैं। पूर्वानुमान के अनुसार आगे भारी बारिश और ओलावृष्टि होने से विजिबिलिटी कम हो सकती है। इन तूफानों के साथ तेज हवाएं चलने की भी आशंका है, जिससे अधिकारियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पहली भी हो चुकी है इस तरह की घटना

बता दें कि सऊदी अरब असामान्य मौसम पैटर्न का अनुभव करने वाला एकमात्र देश नहीं है। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इसी तरह के मौसम में बदलाव से गुजर चुका है। 14 अक्टूबर को, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (NCM) ने कई क्षेत्रों में अनुमानित वर्षा, तूफान और ओलावृष्टि की संभावना के संबंध में अलर्ट जारी किया। यूएई के मौसम विभाग ने इन बदलावों के लिए अरब सागर से ओमान की ओर फैली कम दबाव प्रणालियों को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे पूरे क्षेत्र में मौसम की स्थिति प्रभावित हुई है।

टैक्सपेयर का ब्याज अब माफ या कम कर सकते हैं अधिकारी, CBDT ने दी अनुमति, जानिए क्या है नियम

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आयकर विभाग ने कर अधिकारियों को निर्दिष्ट शर्तों के अधीन करदाता के देय ब्याज को माफ करने या कम करने की अनुमति दे दी है। आयकर अधिनियम की धारा 220 (2ए) के तहत यदि कोई करदाता किसी मांग नोटिस में निर्दिष्ट कर राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे भुगतान करने में देरी की अवधि के लिए एक प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा। यह अधिनियम प्रधान मुख्य आयुक्त (पीआरसीसीआईटी) या मुख्य आयुक्त (सीसीआईटी) या प्रधान आयुक्त (पीआरसीआईटी) या आयुक्त रैंक के अधिकारियों को देय ब्याज राशि को कम करने या माफ करने का अधिकार भी देता है।

कितना ब्याज हो सकता है माफ

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने चार नवंबर को जारी एक परिपत्र के जरिये ब्याज की मौद्रिक सीमा निर्दिष्ट की है, जिसे कर अधिकारी माफ कर सकते हैं या कम कर सकते हैं। इसके अनुसार, पीआरसीआईटी रैंक का अधिकारी 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया ब्याज को कम करने या माफ करने का फैसला कर सकता है। 50 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये तक के बकाया ब्याज के लिए सीसीआईटी रैंक का अधिकारी छूट/कटौती का फैसला करेगा। जबकि पीआरसीआईटी या आयकर आयुक्त 50 लाख रुपये तक के बकाया ब्याज पर फैसला कर सकते हैं।

तीन शर्तें पूरी करनी होंगी 

वहीं, धारा 220(2ए) के तहत देय ब्याज में कटौती या छूट तीन निर्दिष्ट शर्तों के पूरा होने पर मिलेगी। ये शर्ते हैं, ऐसी राशि के भुगतान से करदाता को वास्तविक कठिनाई हुई है या होगी। ब्याज भुगतान में चूक करदाता के नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण हुई थी। करदाता ने कर निर्धारण से संबंधित जांच में या उससे देय किसी राशि की वसूली की कार्यवाही में सहयोग किया है। नांगिया एंड कंपनी एलएलपी साझेदार सचिन गर्ग ने कहा, ‘‘सीबीडीटी के इस कदम से धारा 220 के तहत ब्याज में छूट या कमी के लिए करदाता द्वारा किए गए आवेदनों का शीघ्र निपटान करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह ध्यान देने योग्य है कि अधिनियम की धारा 220 के तहत ब्याज में ऐसी कमी या छूट की मांग करने के लिए जिन निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करना आवश्यक है, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।’’ एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ साझेदार रजत मोहन ने कहा कि इस कदम से ब्याज राहत देने में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

दिल्ली में ‘जहरीली हवा’ का कहर जारी, छठ महापर्व पर यमुना के गंदे पानी में नहाने को मजबूर हुए लोग

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राजधानी दिल्ली और नोएडा में मंगलवार को भी प्रदूषण की स्थिति खतरनाक ही रही। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) इस समय औसतन 385 तक पहुंच चुका है, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण की वजह से शहर के विभिन्न इलाकों में दृश्यता कम हो गई है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर देखने को मिल रहा है। वहीं, छठ के मौके पर दिल्ली में यमुना नदी में भी प्रदूषण के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और इसमें 12-12 फुट ऊंचे झाग के गुब्बारे तैरते हुए दिखाई दे रहे हैं।

खतरनाक स्तर पर पहुंचा हुआ है प्रदूषण

दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग है, लेकिन सभी प्रमुख क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित है:

आनंद विहार: 457
अशोक विहार: 419
अलीपुर: 393
बवाना: 414
बुराड़ी: 378
मथुरा रोड: 366
द्वारका: 403
IGI एयरपोर्ट: 388
जहांगीरपुरी: 440
ITO: 344
लोधी रोड: 319
मुंडका: 415
मंदिर मार्ग: 381
ओखला: 388
पटपड़गंज: 393
पंजाबी बाग: 403
आर के पुरम: 396
रोहिणी: 397
विवेक विहार: 422
वज़ीरपुर: 437
नजफगढ़: 398

दिल्ली के अलावा, नोएडा का AQI भी 308 दर्ज किया गया है जो कि ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।

यमुना नदी में प्रदूषण की गंभीर स्थिति

यमुना नदी के बैराज में 12-12 फुट ऊंचे झाग के गुब्बारे तैर रहे हैं, जो नदी के बढ़ते प्रदूषण को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। नदी में उठने वाली इस झाग की वजह से आसपास के पर्यावरण और जलजीवों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा महापर्व छठ को देखते हुए श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका घातक असर पड़ सकता है। नदी का पानी काला हो चुका है, बदबू भी आ रही है लेकिन छठ महापर्व को देखते हुए लोग मजबूरी में इसी गंदे पानी में पूरे परिवार के साथ स्नान कर रहे हैं।

प्रदूषण पर नियंत्रण के उपायों की जरूरत

दिल्ली और नोएडा में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए एक्सपर्ट्स का कहना है कि सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सरकारी एजेंसियों को जल्दी और प्रभावी उपायों की आवश्यकता है, हालांकि सरकार द्वारा किए गए उपाय अभी तक नाकाफी ही साबित हुए हैं। दिल्ली में पिछले कुछ सालों से ठंड के मौसम में प्रदूषण की स्थिति घातक ही रहती आई है और इस साल भी कुछ खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

नागरिकों से अपील

दिल्ली और नोएडा के नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस समय बाहर निकलते वक्त मास्क का उपयोग करें और जितना संभव हो सके घर में ही रहें। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और श्वास संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को बाहर जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है कि प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर का मुकाबला सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है।

इस राज्य के किसी भी थाना परिसर में मंदिर बनाने पर लगी रोक, हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

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जबलपुर: एमपी हाई कोर्ट ने राज्य के सभी थानों के परिसरों में मंदिरों के निर्माण पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में सरकार को नोटिस भी जारी किया है। इस मामले में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे एक वकील ने पूरी जानकारी दी। वकील ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश एस के कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश के थानों के परिसरों में मंदिरों के निर्माण को चुनौती देने वाली याचिका पर डीजीपी और अन्य को नोटिस भी जारी किये। वहीं हाई कोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।

याचिका की सुनवाई के बाद दिया फैसला

दरअसल, एक रिटायर सरकारी कर्मी और वकील ओम प्रकाश यादव ने मध्य प्रदेश के थाना परिसरों में मंदिरों के निर्माण को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। यादव के वकील सतीश वर्मा ने पत्रकारों को इस बात की जानकारी दी। वकील शतीश वर्मा ने दलील दी कि जिन खुली जगहों पर इन मंदिरों का निर्माण किया जा रहा है वह सार्वजिनक स्थल हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक ढांचों के निर्माण पर रोक लगा दी गयी है।

पेश की गई ये दलील

वकील सतीश वर्मा का कहना है कि ऐसे में मध्य प्रदेश में थाना परिसरों में मंदिरों का यह निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए कुछ थानों में मंदिर पहले ही बनाये जा चुके हैं। सतीश वर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के साथ कुछ तस्वीरें भी संलग्न की हैं, जिनके बारे में उन्होंने कहा है कि कुछ थानों के अंदर मंदिर बनाए गए हैं।

थाना परिसरों में नहीं बनेंगे धार्मिक स्थल

बता दें कि आम तौर पर कई थानों में मंदिर बने हुए दिख जाते हैं। हालांकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक ढांचों के निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसी आदेश का हवाला देते हुए याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने किसी भी थाने में धार्मिक स्थल (मंदिर) बनाने पर रोक लगा दी है।

सोना ₹79,000 के पार, एक दिन में 936 रुपए बढ़ा:चांदी में भी करीब ₹500 की तेजी, यह 98,340 रुपए किलो बिक रही

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धनतेरस पर ऑल टाइम हाई बनाने के बाद छोटी दिवाली पर गोल्ड ने नया हाई बनाया है। आज यानी बुधवार (30 अक्टूबर) को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत कल के दाम से 936 रुपए बढ़कर 79,681 रुपए पर पहुंच गया है। कल सोने की कीमत 78,745 रुपए थी।

वहीं, चांदी की कीमत में भी 467 रुपए की तेजी है और यह 98,340 रुपए प्रति किलो की कीमत पर पहुंच गई है। इससे पहले चांदी 97,873 रुपए पर थी। इसी महीने 23 अक्टूबर को चांदी ने 99,151 रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था।
4 महानगरों और भोपाल में सोने की कीमत

दिल्ली : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 74,550 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 81,310 रुपए है।
मुंबई : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 74,440 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 81,160 रुपए है।
कोलकाता : 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 74,440 रुपए और 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 81,160 रुपए है।
चेन्नई : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 74,440 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 81,160 रुपए है।
भोपाल : 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 74,450 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 81,210 रुपए है।
अगले धनतेरस तक 87 हजार तक जा सकता है सोना
HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी हेड अनुज गुप्ता के अनुसार, जियोपॉलिटिकल टेंशन और फस्टिव सीजन शुरू होने से सोने को सपोर्ट मिल रहा है। इससे आने वाले दिनों में सोने-चांदी में बढ़त देखने को मिल सकती है। अगले घनतेरस तक सोना 87 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।

सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड रहता है। इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह होता है- AZ4524। हॉलमार्किंग के जरिए ये पता करना संभव है कि कोई सोना कितने कैरेट का है।
कल यानी 29 अक्टूबर को धनतेरस था। इस दिन सोने में निवेश शुभ माना जाता है। HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी हेड अनुज गुप्ता के अनुसार सोना अगले धनतेरस तक 87 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।

ऐसे में अगर आप सोने में निवेश का प्लान बना रहे हैं तो ये सही समय हो सकता है। आज धनतेरस के अवसर पर हम आपको सोने में निवेश के 4 तरीकों के बारे में बता रहे हैं। खास बात ये है कि आप 1 रुपए से भी निवेश शुरू कर सकते हैं।

दोबारा सुलगी पुरानी पेंशन की चिंगारी, सरकारी कर्मियों को मंजूर नहीं UPS, 17 नवंबर को दिल्ली में होगी बड़ी

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एनपीएस में सुधार कर लाई गई ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ (यूपीएस) से केंद्र सरकारी के कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। अभी तक यूपीएस का गजट भी जारी नहीं हुआ है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने विरोध का बिगुल बजा दिया है। ‘नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने बताया, 17 नवंबर को नई दिल्ली में ओपीएस बहाली के लिए पेंशन जयघोष महारैली आयोजित की जाएगी। रैली की तैयारियों के मद्देनजर, पटेल ने कई राज्यों का दौरा किया है। उनका दावा है कि जंतर मंतर पर होने वाली रैली में केंद्र एवं विभिन्न प्रदेशों की सरकारों के कर्मचारी शिरकत करेंगे। पटेल ने बताया, हमारा फोकस नाम पर नहीं है, बल्कि ओपीएस की आत्मा पर है। सरकार से मांग है कि पेंशन की गणना 25 वर्ष के स्थान पर 20 वर्ष हो और कर्मचारी के अंशदान पर जीपीएफ की मान्यता रहे, ताकि वह कर्मचारी को पूरा वापस मिल जाए।

इस विरोध प्रदर्शन की कड़ी में सबसे पहले ‘एनएमओपीएस’ द्वारा 26 सितंबर को देश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के सदस्यों ने दो अक्तूबर को प्रतिज्ञा ली है कि जब तक वे गैर-अंशदायी ‘पुरानी पेंशन’ योजना हासिल नहीं कर लेते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। रेलवे के विभिन्न कर्मचारी संगठन भी यूपीएस के विरोध में खड़े हो गए हैं। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना था, कर्मचारियों ने यूपीएस के खिलाफ अपने आंदोलन को दोबारा से प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। अंशदायी पेंशन योजना, ‘यूपीएस’ का पुरजोर विरोध किया जाएगा। पिछले 20 वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी, अंशदायी पेंशन योजना के खिलाफ लड़ रहे हैं।
उनकी मांग, गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल कराना है। सरकारी कर्मचारियों के पास अब यही विकल्प बचा है कि वे यूपीएस में शामिल हों या एनपीएस में बने रहें।
बतौर श्रीकुमार, यूपीएस कुछ नहीं है, बल्कि एनपीएस का विस्तार है। राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों ने भी यूपीएस को खारिज कर दिया है। कई राज्यों में रैलियां और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वे यूपीएस को स्वीकार नहीं कर सकते। वजह, यह एक अंशदायी प्रकृति की योजना है। कर्मचारियों की संचित निधि, जिसमें उन्होंने 3 दशकों से अधिक समय तक योगदान दिया है, उसे वापस नहीं लौटाया जाएगा। भले ही पेंशन की पात्रता 25 साल रखी गई है, लेकिन कर्मचारियों को पेंशन 60 साल की उम्र के बाद ही मिलेगी। पुरानी पेंशन योजना में मिलने वाले कई लाभ एनपीएस/यूपीएस में नहीं मिलते हैं। इससे कर्मियों को आर्थिक नुक़सान हुआ है।

गांधी जयंती दिवस पर एआईडीईएफ के प्रत्येक सदस्य ने शपथ ली है कि वे, एक रक्षा नागरिक कर्मचारी, विनाशकारी एनपीएस और यूपीएस अंशदायी पेंशन योजना से मुक्त होने के लिए सभी संघर्षों और आंदोलनों में शामिल होने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 (अब 2021) के तहत गैर अंशदायी पेंशन प्राप्त करने के लिए सभी ट्रेड यूनियन एक्शन कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं और उनमें भाग लेंगे। कर्मचारियों ने प्रतिज्ञा की है कि वे जब तक गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना हासिल नहीं कर लेते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। सभी सरकारी कर्मचारियों की इस वास्तविक और उचित मांग को वास्तविकता में बदलने के लिए वे सब एक हैं। इस बाबत दूसरे कर्मचारी संगठनों से भी चर्चा हो रही है।

नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने बताया, 20 वर्ष की नौकरी के बाद 50 प्रतिशत पेंशन का आधार सुनिश्चित हो, कर्मचारी अंशदान की ब्याज सहित यानी जीपीएफ की तरह वापसी और वीआरएस/अनिवार्य सेवानिवृत्ति/सेवानिवृत्ति पर संपूर्ण राशि की वापसी, सरकार को ये मांगें माननी ही पड़ेंगी। 17 नवंबर की रैली में देशभर से लाखों कर्मचारी भाग लेंगे। इनमें दिल्ली, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, असम, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के अलावा केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन भी शामिल हैं।

पटेल ने कहा, हमने पहले भी रणनीतिक रूप से सरकार को कदम दर कदम, एनपीएस पर झुकाया है। केंद्र सरकार को एनपीएस पर पीछे हटना पड़ा है। अब पुरानी पेंशन के मामले में कर्मचारियों की दो महत्वपूर्ण डिमांड बची हैं। पहली है पेंशन की गणना 25 वर्ष के स्थान पर 20 वर्ष हो और दूसरी, कर्मचारी के अंशदान पर जीपीएफ की मान्यता रहे, ताकि वह कर्मियों पूरा वापस मिल जाए। ये दोनों मुद्दे, इस बार 17 नवंबर की रैली के बाद हल हो जाएंगे। पेंशन तो हम हुबहू पुरानी ही लेकर रहेंगे। बस उसका नाम ओपीएस नहीं होगा। बतौर पटेल, नाम तो पहले भी ओपीएस नहीं था। नाम कुछ भी हो सकता है, हमारा फोकस नाम पर नहीं है, बल्कि ओपीएस की आत्मा पर है। कर्मचारियों का सरकार के लिए सुझाव है, नाम चाहे कुछ भी रख लो, लेकिन उन्हें ओपीएस के सभी प्रावधानों का फायदा दे।

सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- प्रदेश को समृद्ध और गौरवशाली बनाने का कार्य कर रही सरकार

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लालपरेड ग्राउंड में ध्वजारोहण कर मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह का उदघाटन किया। सीएम ने कहा कि दीपोत्सव और राज्योत्सव की एक साथ शुरुआत हो रही है।
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल के लालपरेड मैदान में राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि दीपोत्सव का उत्सव चल रहा है और इसी के साथ राज्य का स्थापना दिवस भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने के साथ-साथ राज्य का गौरव बढ़ाने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की आठ करोड़ जनता देवतुल्य है और राज्य सरकार चार दिवसीय विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्थापना दिवस को मना रही है। उन्होंने प्रदेश के पौराणिक स्थलों का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में 11 वर्ष बिताए और भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की, जिससे यह धरती धन्य हुई है। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री देश की सीमाओं को सुरक्षित रख रहे हैं और भारत को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विंध्य, सतपुड़ा, मालवा, और निमाड़ की अनोखी पहचान का भी जिक्र किया और कहा कि ये क्षेत्र मध्यप्रदेश को देश-दुनिया में अलग पहचान देने का कार्य कर रहे हैं।
धर्म और अध्यात्म की त्रिवेणी बहती है इस धरती पर
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म और अध्यात्म की त्रिवेणी सतपुड़ा की इस धरती पर बहती है, जिससे मध्यप्रदेश गर्व से सिर ऊंचा किए हुए अपनी अलग पहचान बनाता है। यहां की लोक कला, जनजातियां, और मालवा का गौरवशाली इतिहास हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। हमारे राज्य के लोग राजा विक्रमादित्य के साहस और राजा भोज की ऐतिहासिक उपलब्धियों से परिचित हैं। भगवान श्रीराम ने यहाँ अपने 11 वर्षों का वनवास बिताया, जिससे हमारे इतिहास में और भी गौरव का अध्याय जुड़ता है। आज चित्रकूट धाम पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। गुप्त गोदावरी से मंदाकिनी तक बहती इन धाराओं की प्रत्येक लहर हमारे इतिहास के गौरव की कहानी कहती है।
सीएम ने प्रदेश की उपलब्धियां गिनाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी अनगिनत विशेषताओं को अपने में समेटे हुए है। यह प्रदेश न केवल देश का ‘फूड बॉस्केट’ है बल्कि सोयाबीन उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बिजली उत्पादन में अग्रणी होने के साथ ही यहां बाघों की मौजूदगी भी हमारा गौरव है। अब हमारे पास ‘चीता स्टेट’ का नया सम्मान भी जुड़ गया है। इंदौर लगातार 7 वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है, और भोपाल को सबसे स्वच्छ राजधानी का दर्जा मिला है। हमें 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड भी प्राप्त हो चुका है, जो हमारी कृषि में उत्कृष्टता का प्रमाण है।

आर्मी बैंड ने सुमधुर धुनों की प्रस्तुति दी
समारोह में मध्यप्रदेश के राज्य स्तरीय खेल मलखंब का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सेना द्वारा लगाए गए टैंक और अन्य सैन्य एवं युद्ध उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आर्मी बैंड ने सुमधुर धुनों की प्रस्तुति दी, जिससे सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कथक नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना की प्रस्तुति सहित अन्य लोकनृत्यों ने दर्शकों को मोहित किया। इस अवसर पर मंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, महापौर मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक रामेश्वर शर्मा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना, सीएम के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा और प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

साल में पांच दिन नोटों से सजने वाला देश का इकलौता मंदिर, भक्तों के गहनों से सजती हैं मां लक्ष्मी

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मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित महालक्ष्मी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो पूरे साल में पांच दिनों के लिए खास रूप में सजता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से मां लक्ष्मी का शृंगार किया जाता है, जो कि देशभर में अपनी तरह का इकलौता आयोजन है।
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित महालक्ष्मी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो पूरे साल में केवल पांच दिनों के लिए खास महत्व रखता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से मां लक्ष्मी का श्रृंगार किया जाता है, जो कि देशभर में अपनी तरह का इकलौता आयोजन है। पांच दिनों तक नोटों-गहनों से सजा मंदिर भक्तों के आकर्षण का केंद्र होता है। दीवाली के दौरान मां लक्ष्मी के दर्शन और उनकी विशेष साज-सज्जा को देखने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
पांच दिनों के लिए सजता है मंदिर
महालक्ष्मी का यह मंदिर यूं तो सालभर भक्तों के लिए खुला रहता है, पर दिवाली पर खासतौर पर पांच दिनों के लिए सजता है, और खुला रहता है। नोटों से सजावट के बाद धनतेरस के दिन ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है और गोवर्धन पूजा के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अनोखा शृंगार: गहनों और नोटों से सजीं मां लक्ष्मी
यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मां लक्ष्मी का श्रृंगार भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से किया जाता है। इस अनोखी परंपरा में पिछले कई वर्षों से कभी कोई गहना गायब नहीं हुआ, जो भक्तों के बीच एक गहरी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति को पांच हाथियों पर विराजमान दिखाया गया है, और उनके साथ भगवान गणेश तथा मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी हैं।
करोड़ों के आभूषणों से सजता है मंदिर
दीपावली के मौके पर इस मंदिर में फूलों की जगह नोटों की गड्डियों और आभूषणों से सजावट की जाती है। आभूषणों और नोटों की इस भव्य सजावट का दृश्य देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि यहां सजने वाले आभूषणों और नोटों की कुल कीमत करोड़ों में होती है, जो भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
प्रसाद के रूप में आभूषण और पैसे
दीपावली से पहले भक्त अपने गहने और नोट मंदिर में जमा कराते हैं और इसके बदले उन्हें एक टोकन दिया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन, भक्त अपने टोकन के आधार पर अपने गहने और पैसे प्रसाद के रूप में प्राप्त करते हैं। इस प्रसाद को भक्त अपने घर में समृद्धि का प्रतीक मानकर संभाल कर रखते हैं। महिलाओं को प्रसाद स्वरूप श्रीयंत्र, सिक्के, कौड़ियां, अक्षत, और कंकू युक्त कुबेर पोटली दी जाती है, जिन्हें घर में शुभ माना जाता है।
हफ्तेभर पहले से शुरू होती है भव्य सजावट
महालक्ष्मी मंदिर में सजावट की तैयारी दीपावली से एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है। इस बार भी शरद पूर्णिमा से ही भक्त गहने और नोट लेकर आने लगे थे। ऐसी मान्यता है कि जिनके गहनों का इस्तेमाल मां लक्ष्मी के श्रृंगार में होता है, उनके घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। मंदिर की सुरक्षा के लिए चार गार्ड और सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। मंदिर के पास स्थित माणक चौक पुलिस थाना में भी 24 घंटे फोर्स तैनात रहती है। इस तरह रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं और भव्य साज-सज्जा के कारण देशभर में प्रसिद्ध है, जहां भक्तों की श्रद्धा और आस्था एक अद्वितीय रूप में मां लक्ष्मी के प्रति व्यक्त होती है।

मोहन सरकार ने दिया दिवाली गिफ्ट, बढ़ाया महंगाई भत्ता, जानें कब खाते में आएगी बढ़ी सैलरी

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भोपाल. दिवाली से पहले मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता 4 फीसदी बढ़ा दिया है. इसके बाद डीए 46 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गई है. मालूम हो कि नई दरें जनवरी 2024 से लागू हो जाएंगी. अब ऐसे में जनवरी से लेकर सितंबर तक का एरियर भी कर्मचारियों को मिलेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी अधिकारी और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला लिया है. मेरी अपनी ओर से सभी को बधाई. उन्होंने कहा कि इसकी बधाई डबल तब हो जाती है जब दीपावली भी है और इस अवसर पर मध्य प्रदेश स्थापना दिवस का कार्यक्रम भी है.
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने बताया कि राज्य शासन ने 46 फीसदी महंगाई भत्ता वित्त विभाग के प्रतिपत्र से स्वीकृत किया है. इसके आधार पर स्वीकृति महंगाई भत्ते की दर एक जुलाई 2023 से प्रभावशील की गई थी. एरियर राशि का भुगतान किस्तों में किया गया. अब सभी शासकीय सेवकों को 1 जनवरी 2024 से महंगाई भत्ता 50 फीसदी की दर से दिया जाएगा. अभी अक्टूबर चल रहा है, लेकिन हम इसे 1 जनवरी से देंगे.
सीएम मोहन यादव ने की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील करते हुए कहा कि हम सभी दिवाली के अवसर पर अपना ध्यान रखें और अपने आसपास के लोगों का भी ध्यान रखें. गरीब से गरीब आदमी के आंखों में भी आनंद आए.
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर के गठन की पहली तारीख, जो 1956 में एक नए प्रदेश का आकार साकार लेकर आई. इसके मध्य में हम सब अपनी-अपनी दिनचर्या चलाते हुए देश की सेवा, मध्य प्रदेश की सेवा, समान रूप से आगे बढ़ती जाए, इस भाव के आधार पर हम काम करते रहते हैं.
सीएम ने कहा कि सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देना चाहूंगा. आप सब अपने लगन, मेहनत, सकारात्मक सोच के कारण से पूरे देश के अधिकारियों -कर्मचारियों में एक विशेष पहचान रखते हैं. इस नाते से सरकार का भी उत्तरदायित्व है कि आपके हितों का भी ध्यान रखें.

इंदौर: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहा था सट्टेबाजी गिरोह, 4 पकड़े गए; सामने आया दुबई कनेक्शन

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मध्य प्रदेश के इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी करवाने वाले गिरोह के 4 एजेंटों को पुलिस ने पकड़ा है और मामले की विस्तार से जांच कर रही है।
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी करवाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने की बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस की अपराध निरोधक शाखा के एक अधिकारी ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में संयुक्त अरब अमीरात के दुबई से सट्टेबाजी का गिरोह चलाए जाने का खुलासा करते हुए पुलिस ने इंदौर से 4 लोगों को हिरासत में लिया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, 2 डेस्कटॉप कम्प्यूटर, 7 मोबाइल फोन के अलावा ऑनलाइन सट्टे का हिसाब-किताब मिला है, और अब पूरे गिरोह के खिलाफ जांच की जा रही है।
अलग-अलग शहरों में बना रखें है अपने एजेंट’
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने पूरे मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुखबिर की सूचना पर पलसीकर कॉलोनी के एक मकान पर छापा मारा गया। पुलिस की छापेमारी में वहां ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी का गिरोह संचालित होना पाया गया। अधिकारी ने बताया कि इस मकान से 4 लोगों को हिरासत में लिया गया जो दुबई से चलाए जा रहे गिरोह के स्थानीय एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। दंडोतिया ने बताया कि पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला कि एक वेबसाइट के जरिये इस गिरोह को दुबई से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ने भारत के अलग-अलग शहरों में अपने एजेंट बनाए हुए हैं।

‘लोगों के जीतने की संभावना न के बराबर होती है’
दंडोतिया ने बताया, ‘पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में संचालित किए जा रहे सट्टे में लोगों के जीतने की संभावना नहीं के बराबर होती है, जबकि गिरोह को चलाने वाले और एजेंट जमकर पैसा बटोरते हैं।’ अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, 2 कम्प्यूटर, 7 मोबाइल फोन आदि उपकरणों के साथ ही ऑनलाइन सट्टे का हिसाब-किताब भी मिला है। दंडोतिया ने बताया कि सट्टेबाजी गिरोह के खिलाफ पुलिस गहराई से जांच कर रही है। बता दें कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के चक्कर में लोगों की मेहनत की कमाई लुटने की खबरें अक्सर आती रहती हैं और इस बारे में लोगों को बार-बार सावधान भी किया जाता रहा है।